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इंग्लैंड का 3 ओवर के बाद स्कोर 27/0:टीम इंडिया में 3 बदलाव, चोटिल बुमराह बाहर; केएल राहुल, अर्शदीप और प्रिंस को मौका

इंग्लैंड का 3 ओवर के बाद स्कोर 27/0:टीम इंडिया में 3 बदलाव, चोटिल बुमराह बाहर; केएल राहुल, अर्शदीप और प्रिंस को मौका

भारत और इंग्लैंड के बीच सीरीज का तीसरा और आखिरी वनडे आज लॉर्ड्स में खेला जा रहा है। इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी है। टीम इंडिया में तीन बदलाव हुए हैं। घुटने की चोट के कारण जसप्रीत बुमराह इस मैच में नहीं खेल रहे हैं। दोनों टीमें सीरीज में 1-1 की बराबरी पर हैं। इंग्लैंड ने 3 ओवर के बाद बिना किसी नुकसान के 27 रन बना लिए हैं। बेन डकेट और जैकब बेथेल क्रीज पर हैं। मैच का स्कोरकार्ड… प्लेइंग-11 भारत: रोहित शर्मा, शुभमन गिल (कप्तान), विराट कोहली, ईशान किशन (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर, केएल राहुल, अक्षर पटेल, गुरनूर बरार, प्रिंस यादव, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा। इंग्लैंड: बेन डकेट, जैकब बेथेल, जो रूट, हैरी ब्रूक (कप्तान), जोस बटलर (विकेटकीपर), सैम करन, विल जैक्स, गस एटकिंसन, जोफ्रा आर्चर, जोश टंग, आदिल रशिद।

नीट‌ रिजल्ट- OMR और मार्कशीट में 600 अंकों तक अंतर:कई क्वालिफाई नहीं कर पाए; हरियाणा में एक ही छात्र के दो अलग रिजल्ट

नीट‌ रिजल्ट- OMR और मार्कशीट में 600 अंकों तक अंतर:कई क्वालिफाई नहीं कर पाए; हरियाणा में एक ही छात्र के दो अलग रिजल्ट

री-नीट के नतीजों के बाद भी छात्रों के बीच भारी असंतोष है। OMR शीट और जारी मार्कशीट के अंकों में बड़ा अंतर होने से विवाद खड़ा हो गया है। ऐसा एक या दो नहीं, बल्कि कई छात्रों के साथ हुआ है। छात्रों का कहना है कि उन्होंने जब अपनी OMR शीट का मिलान ‘फाइनल आंसर-की’ से किया, तो उनके अंक काफी अधिक थे, लेकिन मार्कशीट में नंबर अचानक घट गए। कई छात्रों के अंक 15 से लेकर 600 तक कम हो गए हैं। इस वजह से वे छात्र जो OMR के अनुसार परीक्षा पास कर रहे थे, अब वे ‘क्वालिफाई’ भी नहीं कर पा रहे हैं। विवाद का मुख्य कारण नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की जल्दबाजी मानी जा रही है। एजेंसी ने फाइनल आंसर-की जारी करने के महज 3-4 घंटे बाद ही रिजल्ट घोषित कर दिया। NTA ने 16 जुलाई की देर रात नीट का रिजल्ट जारी किया था। इस साल करीब 20 लाख स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी थी, जिनमें से 11.21 लाख स्टूडेंट्स मेडिकल, डेंटल, AYUSH और अन्य मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए क्वालिफाई हुए हैं। 2020 और 2021 के बाद पहली बार कोई भी छात्र 720 का परफेक्ट स्कोर हासिल नहीं कर पाया। न्याय के लिए हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे छात्र अभिभावक और छात्र इसे बड़ी लापरवाही मान रहे हैं। डॉ. राजेश कुमार सिंह जैसे अभिभावकों ने एनटीए को पत्र लिखकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है और वे अब न्याय के लिए हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, एनटीए ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा- हम सभी शिकायतों की जांच कर रहे हैं। छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे जांच के लिए केवल मूल ओएमआर ही जमा करें। फर्जी/एआई जनरेटेड ओएमआर के मामले में शिकायतकर्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।’ हरियाणा में एक ही छात्र के दो अलग रिजल्ट नीट रिजल्ट को लेकर एक और चौंकाने वाला मामला हरियाणा से सामने आया है। हरियाणा के अभ्यर्थी मुकुल काजल ने एनटीए के महानिदेशक को शिकायत भेजकर आरोप लगाया है कि उनके स्कोरकार्ड में बिना किसी सूचना के बड़ा फेरबदल कर दिया गया। इसे दुरुस्त कराया जाए। शिकायत के अनुसार, 17 जुलाई 2026 को आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड किए गए स्कोरकार्ड में मुकुल के 605/720 अंक (ऑल इंडिया रैंक 9551) दर्ज थे। लेकिन महज कुछ घंटों बाद 18 जुलाई की सुबह जब दोबारा स्कोरकार्ड डाउनलोड किया गया, तो उनके अंक घटकर सिर्फ 60/720 अंक दिखाए। इससे मुकुल की ऑल इंडिया रैंक घटकर 18,76,324 हो गई। छात्र का दावा है कि उनके पास 17 जुलाई का मूल स्कोरकार्ड सुरक्षित है। साथ ही, ओएमआर रिस्पॉन्स शीट और एनटीए की फाइनल आंसर-की के मिलान से भी उनका स्कोर 605 अंक ही बनता है। ------------------------------- नीट से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… NEET में सफल होने वालों में करीब आधे OBC:हर दूसरा सफल छात्र इसी वर्ग से; SC परीक्षार्थी 63% और EWS 76% बढ़े NEET 2026 के नतीजों में मेडिकल शिक्षा के सामाजिक-शैक्षणिक रुझानों में बड़ा बदलाव दिखा है। इस साल परीक्षा देने वालों में OBC सबसे बड़ा वर्ग रहा। कुल रजिस्ट्रेशन में OBC की हिस्सेदारी 41.8% थी, जबकि क्वालिफाई करने वालों में यह बढ़कर 45.7% हो गई। यानी लगभग हर दूसरा सफल छात्र OBC वर्ग से है। पूरी खबर पढ़ें…

दिल्ली HC बोला-वांगचुक की रजामंदी से दवाएं दी जा रहीं:सरकार मनमानी नहीं कर रही; इंसानी शरीर ऐसा कब क्या हो जाए, कोई नहीं जान सकता

दिल्ली HC बोला-वांगचुक की रजामंदी से दवाएं दी जा रहीं:सरकार मनमानी नहीं कर रही; इंसानी शरीर ऐसा कब क्या हो जाए, कोई नहीं जान सकता

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा- सोनम वांगचुक 17-18 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। इस मामले में डिवीजन बेंच पहले ही आदेश दे चुकी थी। स्वास्थ्य बिगड़ने और डिवीजन बेंच के आदेश के कारण उन्हें सरकारी अस्पताल ले जाया गया। सरकार ने उन्हें अस्पताल में ले जाने का फैसला किया, तो इस कार्रवाई को मनमाना नहीं कहा जा सकता। वांगचुक को वहीं दवाएं दी जा रहीं, जिसमें उनकी रजामंदी है। दरअसल सोनम की पत्नी गीतांजलि ने वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से प्राइवेट हॉस्पिटल शिफ्ट करने की मांग की थी। मामले में अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी। दिल्ली पुलिस शनिवार सुबह वांगचुक को जंतर-मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। अस्पताल में भी वांगचुक की भूख हड़ताल जारी है। CJP और वांगचुक 28 जून से NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के समर्थन में आमरण अनशन पर हैं। वांगचुक को उठाने के लिए देर रात 1:30 बजे आदेश मिला था दिल्ली पुलिस के आयुक्त अनुराग कुमार के पद संभालने के 24 घंटे में वांगचुक को धरना स्थल से उठवाकर अस्पताल पहुंचा दिया गया। सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार रात 1:30 बजे इसके निर्देश मिले। फिर नई दिल्ली जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंदिर मार्ग थाने में रणनीति बनाई। एक मिनट में बिना टकराव के वांगचुक को कैसे एम्बुलेंस तक ले जाएं, इसकी रिहर्सल की। जैमर लगाने पर भी चर्चा हुई, ताकि कार्रवाई के वीडियो न फैलें। सुबह 5 बजे अधिकारी जंतर-मंतर पहुंचें। वहां अंतिम ब्रीफिंग दी। फिर सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी सफेद चादरें लेकर मंच पर चढ़ गए। कार्रवाई की वीडियोग्राफी से बचने के लिए चादरों का इस्तेमाल किया गया। जंतर-मंतर से विरोध प्रदर्शन की 3 तस्वीरें… वांगचुक की हड़ताल का आज 22वां दिन खबर से जुड़े अपडेट्स पढ़ने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

MP में यूसीसी बिल को कैबिनेट की मंजूरी:विधानसभा सत्र में पेश करने की तैयारी; दो राज्यों में UCC विधेयक पारित, एक में लागू

MP में यूसीसी बिल को कैबिनेट की मंजूरी:विधानसभा सत्र में पेश करने की तैयारी; दो राज्यों में UCC विधेयक पारित, एक में लागू

मध्य प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड, यूसीसी) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रविवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यूसीसी विधेयक-2026 के ड्राफ्ट को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। अब इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा। विधानसभा का सत्र कल से शुरू हो रहा है। कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार विधेयक को विधानसभा में पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है। समानता भारतीय संस्कृति और मूल्यों का अभिन्न हिस्सा रही है। इसी भावना के अनुरूप सरकार ने यह कदम उठाया है। देश में उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य है, जबकि गुजरात और असम में यूसीसी विधेयक पारित हो चुका है। भोपाल के इतिहास का भी किया उल्लेख कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने भोपाल के गौरवशाली इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भोपाल का इतिहास परमार राजवंश और राजा भोज से जुड़ा है। यह क्षेत्र प्राचीन काल से सनातन संस्कृति का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि भोपाल का गहरा संबंध गोंड राजवंश से भी है। मदन शाह और संग्राम शाह जैसे शासकों ने क्षेत्र के विकास में योगदान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा- इतिहास में राजा निजाम शाह की विष देकर हत्या और उसके बाद रानी कमलापति द्वारा अपने पुत्र एवं प्रजा की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष का भी विशेष महत्व है। उन्होंने अफगान सरदार दोस्त मोहम्मद खान के दौर और बाद के शासनकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि भोपाल का इतिहास विभिन्न शासकों और संस्कृतियों से समृद्ध रहा है। अब तक दो राज्यों में UCC बिल पारित, एक में लागू जनवरी 2025: उत्तराखंड UCC लागू करने वाला पहला राज्य 6 फरवरी 2024 को विधानसभा में UCC विधेयक पेश हुआ। 7 फरवरी 2024 को पारित हुआ। 11 मार्च 2024 को राष्ट्रपति ने UCC विधेयक को मंजूरी दी। क्रियान्वयन समिति ने 18 अक्टूबर 2024 को नियमावली सरकार को सौंपी। 20 जनवरी 2025 को नियमावली को कैबिनेट की मंजूरी मिली। इस तरह उत्तराखंड UCC लागू करने वाला पहला राज्य बन गया। मार्च 2026: गुजरात UCC बिल पास करने वाला दूसरा राज्य बना गुजरात विधानसभा में मार्च 2026 में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पास कराया गया था। गुजरात UCC बिल पास करने वाला देश का दूसरा राज्य बना है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया था। विधानसभा में बिल पर वोटिंग के दौरान कांग्रेस ने वॉकआउट कर दिया था। बिल बहुमत से पास हो गया। मई 2026: असम UCC बिल पास करने वाला तीसरा राज्य बना असम विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल 27 मई को पेश किया गया था। यह बिल सदन से पारित भी हो गया। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के मुताबिक अनुसूचित जनजातियां (पहाड़ी) और अनुसूचित जनजातियां (मैदानी) UCC के दायरे से बाहर रहेंगी। साथ ही 'पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों, प्रथाओं और अनुष्ठानों' को भी इससे छूट दी जाएगी। आजाद भारत से पहले गोवा में UCC गोवा में पहले से ही UCC लागू है, लेकिन वहां इसे पुर्तगाली सिविल कोड के तहत लागू किया गया था। उत्तराखंड आजादी के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य है। सन् 1835 में, ब्रिटिश सरकार ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें आपराधिक साक्ष्य और अनुबंधों के संबंध में देश भर में एक समान कानून बनाने का आह्वान किया गया था। इसे सन् 1840 में लागू भी किया गया, लेकिन धर्म के आधार पर हिंदुओं और मुसलमानों के व्यक्तिगत कानूनों को अलग रखा गया। यहीं से समान नागरिक संहिता की मांग शुरू हुई। 1941 में बीएन राव समिति का गठन किया गया था, जिसने हिंदुओं के लिए एक समान नागरिक संहिता बनाने की बात कही थी। आजादी के बाद, हिंदू संहिता विधेयक पहली बार 1948 में संविधान सभा में प्रस्तुत किया गया था। इसका उद्देश्य हिंदू महिलाओं को बाल विवाह, सती प्रथा और बुर्का जैसी गलत प्रथाओं से मुक्त करना था। ……………………………….. यह खबर भी पढ़ें बंगाल में भी UCC लाने की तैयारी: भाजपा ने सरकार बनने के 6 महीने के अंदर लागू करने का वादा किया था पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार 29 जून को विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश करने वाली थी। हालांकि, बिल पेश नहीं हो पाया। भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले अपने संकल्प पत्र में सरकार बनने के छह महीने के भीतर पश्चिम बंगाल में UCC लागू करने का वादा किया था। 9 मई को नई सरकार का गठन हुआ था। पूरी खबर पढ़ें...

ICICI बैंक का मुनाफा 16% बढ़कर ₹14,805 करोड़:पहली तिमाही में अनुमान से बेहतर रहे नतीजे, बैंक की एसेट क्वालिटी भी सुधरी

ICICI बैंक का मुनाफा 16% बढ़कर ₹14,805 करोड़:पहली तिमाही में अनुमान से बेहतर रहे नतीजे, बैंक की एसेट क्वालिटी भी सुधरी

ICICI बैंक लिमिटेड ने अप्रैल-जून तिमाही के लिए अपने स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में साल-दर-साल 15.95% की बढ़त दर्ज की है। यह बढ़कर 14,804.5 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। बैंक का यह मुनाफा बाजार के अनुमानों से काफी बेहतर रहा। इस निजी क्षेत्र के बड़े बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी उम्मीद से ज्यादा तेजी से बढ़ते हुए 12.7% की एनुअल ग्रोथ के साथ 24,384.35 करोड़ रुपए रही। बाजार के अनुमानों को पीछे छोड़ा CNBC-TV18 के एनालिस्ट पोल के अनुसार, बाजार को उम्मीद थी कि इस तिमाही में ICICI बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 9% की बढ़त के साथ 23,689 करोड़ रुपए रह सकती है। वहीं, नेट प्रॉफिट में पिछले साल के मुकाबले 7% की ग्रोथ का अनुमान था, जिसके तहत इसके 13,616 करोड़ रुपए रहने की उम्मीद जताई गई थी। बैंक ने मुनाफे और इंटरेस्ट इनकम दोनों ही मामलों में इन अनुमानों को पीछे छोड़ दिया। मार्जिन और एसेट क्वालिटी में सुधार जून तिमाही के दौरान बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में तिमाही और सालाना दोनों आधार पर सुधार देखने को मिला है। इस तिमाही में NIM 4.36% दर्ज किया गया। हालांकि, मार्च तिमाही में यह 4.32% और पिछले साल की समान अवधि में 4.34% के स्तर पर था। इसके साथ ही बैंक की एसेट क्वालिटी को भी और मजबूती मिली है। लोन बुक और डिपॉजिट में 14% की ग्रोथ 30 जून 2026 तक बैंक का कुल लोन पोर्टफोलियो सालाना आधार पर 19.6% की रफ्तार से बढ़कर 16,31,260 करोड़ रुपए हो गया। वहीं कुल डिपॉजिट में भी 14% की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 18,33,586 करोड़ रुपए पर पहुंच गई। इसी तरह औसत डिपॉजिट भी 14% बढ़कर 17,48,028 करोड़ रुपए रहा है, जबकि बैंक का एवरेज कासा (CASA) रेशियो 38.1% दर्ज किया गया है। बैंक को एनपीए के मोर्चे पर राहत मिली 30 जून 2026 तक बैंक का ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) रेशियो घटकर 1.38% पर आ गया है, जो मार्च के अंत में 1.40% और पिछले साल की समान अवधि में 1.67% था। वहीं बैंक का नेट एनपीए रेशियो की बात करें तो यह 0.35% रहा, जो पिछली तिमाही में 0.33% और एक साल पहले 0.41% के स्तर पर था। बैंक ने 2026 में अब तक 8.7% रिटर्न दिया शुक्रवार को ICICI बैंक के शेयर 1.84% की बढ़त के साथ 1,444.3 रुपए पर बंद हुए थे। साल 2026 में अब तक इस स्टॉक ने निवेशकों को 8.7% का रिटर्न दिया है। इसकी तुलना में देखें तो इसी अवधि के दौरान शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 50 में 6.9% की गिरावट दर्ज की गई है, यानी बैंक ने मार्केट के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। क्या होती है नेट इंटरेस्ट इनकम और नेट इंटरेस्ट मार्जिन? नेट इंटरेस्ट इनकम (NII): बैंक मुख्य रूप से दो काम करता है- जमा यानी डिपॉजिट स्वीकार करना और लोन देना। लोन देने पर बैंक को जो ब्याज मिलता है, उसमें से जमाकर्ताओं को दिए जाने वाले ब्याज को घटाने के बाद बची रकम को नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) कहते हैं। यह बैंक की मुख्य कमाई होती है। नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM): यह किसी बैंक की वित्तीय सेहत को मापने का एक पैमाना है। बैंक अपनी कुल ब्याज कमाने वाली संपत्तियों (जैसे लोन) पर जितना ब्याज कमाता है और जमा राशि पर जितना ब्याज चुकाता है, उसके अंतर को प्रतिशत में व्यक्त करने पर इसे नेट इंटरेस्ट मार्जिन कहा जाता है। नॉन परफॉर्मिंग एसेट या NPA क्या है? जब कोई व्यक्ति या संस्था किसी बैंक से लोन लेकर उसे वापस नहीं करती, तो उसे बैड लोन या नॉन परफॉर्मिंग एसेट या NPA कहा जाता है। यानी इन लोन्स की रिकवरी की उम्मीद काफी कम होती है। नतीजतन बैंकों का पैसा डूब जाता है और बैंक घाटे में चला जाता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक, अगर किसी बैंक लोन की किस्त 90 दिनों तक यानी तीन महीने तक नहीं चुकाई जाती है, तो उस लोन को NPA घोषित कर दिया जाता है। अन्य वित्तीय संस्थाओं के मामले में यह सीमा 120 दिन की होती है। बुक को क्लियर करने के लिए बैंकों को ऐसा करना होता है। ये खबर भी पढ़ें… HDFC बैंक का मुनाफा 5% बढ़कर ₹19,060 करोड़: नेट इंटरेस्ट इनकम 6.7% बढ़ी; बैंक के नतीजे एक्सपर्ट्स के अनुमान से कम रहे HDFC बैंक लिमिटेड ने शनिवार को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे घोषित कर दिए हैं। इस तिमाही (Q1 FY27) में बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 4.98% बढ़कर 19,059.72 करोड़ रुपए रहा। हालांकि, यह मुनाफा CNBC-TV18 पोल के 19,332 करोड़ रुपए के अनुमान से कम रहा। पूरी खबर पढ़ें…

दावा-खामेनेई के अंतिम संस्कार में विदेश मंत्री को पत्थर मारे:ईरानी राष्ट्रपति को गालियां दीं; कट्टरपंथियों का आरोप- सरकार अमेरिका के सामने झुकी

दावा-खामेनेई के अंतिम संस्कार में विदेश मंत्री को पत्थर मारे:ईरानी राष्ट्रपति को गालियां दीं; कट्टरपंथियों का आरोप- सरकार अमेरिका के सामने झुकी

अमेरिका के साथ युद्धविराम समझौते के बाद ईरान के भीतर राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ पर अब ईरान के कट्टरपंथी धड़े 'सॉफ्ट कूप' यानी बिना हथियारों के सत्तापलट करने का आरोप लगा रहे हैं। कट्टरपंथियों का कहना है कि इन नेताओं ने अमेरिका से समझौता करके ईरान के सिद्धांतों से समझौता किया है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह तेहरान में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान यह नाराजगी खुलकर दिखाई दी। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान जब खामेनेई के ताबूत के साथ चल रहे थे, तब काले कपड़े पहने कुछ लोगों ने राष्ट्रपति के खिलाफ नारे लगाए। वहीं, अंतिम संस्कार स्थल से कुछ दूरी पर विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर पत्थर फेंके गए और उन्हें देश बेचने वाला गद्दार कहा गया। हालात इतने बिगड़ गए कि उन्हें वहां से भागना पड़ा। कट्टरपंथियों का आरोप- अमेरिका के सामने सरकार झुक गई CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी गुटों का मानना है कि अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने के बजाय सरकार ने अमेरिका के सामने झुककर समझौता कर लिया। उनका कहना है कि यह समझौता नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के आदेशों के खिलाफ किया गया। मुजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उन्होंने न तो देश को संबोधित किया है और न ही खुलकर अपनी सत्ता का प्रदर्शन किया है, जबकि उनके नाम पर सरकार बातचीत भी कर रही है और देश भी चला रही है। कट्टरपंथियों का आरोप है कि मुजतबा की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर मौजूदा सरकार अपनी ताकत बढ़ाने में लगी है। उनका दावा है कि वे संसद को कमजोर करना चाहती है। मुजतबा खामेनेई के लगातार सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने के कारण राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची युद्ध के बाद ईरान के सबसे प्रमुख चेहरे बन गए हैं। कट्टरपंथियों की नाराजगी की एक बड़ी वजह यही है। अंतिम संस्कार में जंग का संदेश, कुछ दिन बाद ही टूट गया युद्धविराम ईरान में युद्ध के दौरान राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की लगातार अपील की जा रही थी, लेकिन अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में कट्टरपंथी गुटों का दबदबा साफ दिखाई दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी गुटों ने इस मौके का इस्तेमाल अमेरिका के खिलाफ फिर से युद्ध छेड़ने की मांग उठाने और ट्रम्प सरकार के साथ हुए किसी भी समझौते को पूरी तरह खारिज करने के लिए किया। कट्टरपंथियों की यह इच्छा कुछ ही दिनों बाद पूरी होती नजर आई। इस सप्ताह ईरान और अमेरिका के बीच हुआ नाजुक युद्धविराम लगभग टूट गया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को निशाना बनाकर इस समुद्री मार्ग पर अपना कंट्रोल दिखाने की कोशिश की। इसके जवाब में अमेरिका ने जवाबी हमले किए। राष्ट्रपति को खुलेआम दी गई थी जान से मारने की धमकी युद्ध दोबारा शुरू होने से पहले भी कट्टरपंथी नेता अमेरिका से समझौता करने वाले अधिकारियों पर लगातार हमला बोल रहे थे। ईरानी शासन से जुड़े धार्मिक गायक मोहम्मद अली बख्शी ने एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति मसूद पजशकियान को खुलेआम धमकी दी थी। उन्होंने कहा- राष्ट्रपति महोदय, अगर सुप्रीम लीडर की शर्तें पूरी नहीं हुईं तो हमारी तलवार होगी और आपका गला होगा। हम आपकी जिंदगी को जहन्नुम बना देंगे। राष्ट्रपति को जान से मारने की इस धमकी की ईरान में काफी आलोचना हुई, लेकिन बख्शी के खिलाफ किसी कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई। गालिबाफ भी कट्टरपंथियों के निशाने पर कट्टरपंथियों के निशाने पर सिर्फ राष्ट्रपति और विदेश मंत्री ही नहीं हैं। अमेरिका के साथ बातचीत करने वाले मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ भी उनके निशाने पर हैं। गालिबाफ पहले रिवोल्यूशनरी गार्ड्स में कमांडर रह चुके हैं और लंबे समय से ईरान की राजनीति में सक्रिय हैं। कट्टरपंथी सांसद कमरान गजनफारी ने जुलाई की शुरुआत में जारी एक वीडियो मैसेज में आरोप लगाया कि मौजूदा नेतृत्व सर्वोच्च नेता और संसद की भूमिका कमजोर कर रहा है। कट्टरपंथियों को किनारे करने की कोशिश तेज ईरान में करीब चार महीने बाद 14 जुलाई को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। इसमें सत्ता संघर्ष खुलकर सामने आया और अमेरिका के साथ हुए समझौते का विरोध करने वाले दो प्रमुख कट्टरपंथी सांसदों को अहम संसदीय पदों से हटा दिया गया। सबसे पहले अमेरिका से समझौते का सबसे ज्यादा विरोध करने वाले कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियन को संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग (नेशनल सिक्योरिटी कमीशन) से हटा दिया गया। इसके अलावा इसके प्रवक्ता रहे इब्राहिम रेजाई को भी हटा दिया गया। नबावियन पहले अमेरिका के साथ बातचीत करने वाले ईरानी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रह चुके हैं, लेकिन बाद में उन्होंने वार्ता का विरोध शुरू कर दिया। आरोप है कि उन्होंने पिछले महीने समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले उसका मसौदा मीडिया में लीक कर दिया था, ताकि समझौता रुक सके। विशेषज्ञ बोले- सरकार कट्टरपंथियों का असर कम करना चाहती है एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान की मौजूदा सरकार अब इन कट्टरपंथी गुटों का प्रभाव कम करने की कोशिश कर रही है। हामिदरेजा अजीजी ने CNN से कहा- हम देख रहे हैं कि गालिबाफ इन कट्टरपंथी नेताओं को धीरे-धीरे किनारे कर रहे हैं। ये लोग अब व्यवस्था के लिए बोझ बन चुके हैं और देश में अस्थिरता बढ़ने के साथ अपनी आपसी लड़ाई भी खुलकर सामने ला रहे हैं। हालांकि इन कट्टरपंथियों की संख्या ज्यादा नहीं है, लेकिन संसद और सरकारी न्यूज एजेंसीज आईआरआईबी (IRIB) जैसे कई प्रभावशाली संस्थानों में उनकी मजबूत पकड़ है। इनकी वास्तविक राजनीतिक ताकत कितनी है, यह साफ नहीं है। इस धड़े के प्रमुख नेता और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख सईद जलीली को 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में 1.3 करोड़ से ज्यादा वोट मिले थे। वे चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे थे। ईरान की कुल आबादी करीब 9.3 करोड़ है। ट्रम्प ने कहा था- ईरान भीतर से बंटा हुआ है युद्ध और कूटनीतिक बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कई बार कह चुके हैं कि ईरान का नेतृत्व गंभीर अंदरूनी मतभेदों से जूझ रहा है और यही किसी समझौते में सबसे बड़ी बाधा है। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार और कट्टरपंथियों के बीच मतभेद जरूर हैं, लेकिन पूरे शासन की प्राथमिकता अब भी एक जैसी है। उनका लक्ष्य ऐसा समझौता करना है जिससे युद्ध खत्म हो, ईरान को प्रतिबंधों से राहत मिले और होर्मुज स्ट्रेट पर उसका प्रभाव भी बना रहे। अमेरिका से फिर जंग चाहते हैं कट्टरपंथी CNN के अनुसार, मुजतबा खामेनेई का लगातार सार्वजनिक रूप से सामने न आना, युद्धविराम को लेकर उनका सीमित समर्थन, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का बढ़ता प्रभाव और अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में जुटी भारी भीड़ ने कट्टरपंथियों का मनोबल बढ़ा दिया है। अब वे अमेरिका और इजराइल के खिलाफ युद्ध जारी रखने की खुलकर मांग कर रहे हैं। ईरान के पूर्व विदेश मंत्री और कट्टरपंथी नेता मनूचेहर मुत्ताकी ने बुधवार को एक टीवी इंटरव्यू में कहा, मेरा सुझाव है कि हम क्षेत्र में मौजूद अमेरिका के किसी सैन्य अड्डे पर जाएं, जहां सैकड़ों या शायद हजारों अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। अगर हम उनमें से 100 सैनिकों को पकड़कर ईरान ले आएं, तो इतना ही काफी होगा। यह बयान दिखाता है कि अमेरिका के साथ हुए समझौते के बावजूद ईरान के भीतर सत्ता संघर्ष खत्म नहीं हुआ है। एक तरफ सरकार कूटनीतिक रास्ते से प्रतिबंधों में राहत और युद्ध खत्म करने की कोशिश कर रही है, वहीं कट्टरपंथी धड़े अब भी अमेरिका और इजराइल के खिलाफ टकराव की नीति पर अड़े हुए हैं। इससे आने वाले समय में ईरान की आंतरिक राजनीति और विदेश नीति दोनों पर बड़ा असर पड़ सकता है। ----------------------------- ईरान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका का लगातार सातवीं रात ईरान पर हमला:भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट पर अटैक; ईरान ने कतर-कुवैत पर दागीं मिसाइलें अमेरिका ने शनिवार को लगातार सातवीं रात ईरान पर एयरस्ट्राइक की। इन हमलों में पुल, एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट का एक कंट्रोल (निगरानी) टावर निशाना बना। जवाब में ईरान ने कतर, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन की ओर मिसाइलें दागीं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

HDFC बैंक का मुनाफा 5% बढ़कर ₹19,060 करोड़:नेट इंटरेस्ट इनकम 6.7% बढ़ी; बैंक के नतीजे एक्सपर्ट्स के अनुमान से कम रहे

HDFC बैंक का मुनाफा 5% बढ़कर ₹19,060 करोड़:नेट इंटरेस्ट इनकम 6.7% बढ़ी; बैंक के नतीजे एक्सपर्ट्स के अनुमान से कम रहे

HDFC बैंक लिमिटेड ने शनिवार को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे घोषित कर दिए हैं। इस तिमाही (Q1 FY27) में बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 4.98% बढ़कर 19,059.72 करोड़ रुपए रहा। हालांकि, यह मुनाफा CNBC-TV18 पोल के 19,332 करोड़ रुपए के अनुमान से कम रहा। नेट इंटरेस्ट इनकम ₹33,535 करोड़ के पार बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में सालाना आधार पर 6.7% की बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़कर 33,535.95 करोड़ रुपए पर पहुंच गई है। हालांकि, नेट इंटरेस्ट इनकम भी बाजार के 34,353 करोड़ रुपए के पोल अनुमान को पार करने में चूक गई। बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन 3.26% रहा पहली तिमाही में HDFC बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) कुल एसेट्स पर 3.26% दर्ज किया गया है। वहीं, अगर ब्याज अर्जित करने वाली संपत्तियों यानी इंटरेस्ट अर्निंग एसेट्स के आधार पर देखें तो यह मार्जिन 3.40% रहा है। एसेट क्वालिटी में मामूली बदलाव, ग्रॉस NPA 1.17% एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर बैंक के ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPAs) 30 जून, 2026 तक ग्रॉस एडवांस के 1.17% पर रहे। 31 मार्च 2026 को यह आंकड़ा 1.15% था, जबकि एक साल पहले की समान तिमाही में यह 1.40% था। वहीं, 30 जून, 2026 तक बैंक का नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NNPAs) नेट एडवांस का 0.41% रहा। प्रोविजनिंग और क्रेडिट कॉस्ट का हाल पहली तिमाही में बैंक का कुल प्रोविजंस और कंटिंगेंसीज (प्रॉविजन्स एंड कंटिंगेंसीज) ₹3,060 करोड़ रहा। इसके साथ ही तिमाही के लिए बैंक का कुल क्रेडिट कॉस्ट रेशियो 0.40% दर्ज किया गया है। इस साल 17.2% टूट चुका है बैंक का शेयर शुक्रवार को HDFC बैंक का शेयर 1.4% चढ़कर 819.60 रुपए के स्तर पर बंद हुआ था। साल 2026 में अब तक इस स्टॉक में 17.2% की गिरावट आ चुकी है, जबकि इस दौरान निफ्टी 50 इंडेक्स में 6.9% की कमजोरी देखी गई है। क्या होती है नेट इंटरेस्ट इनकम और नेट इंटरेस्ट मार्जिन? नॉन परफॉर्मिंग एसेट या NPA क्या है? जब कोई व्यक्ति या संस्था किसी बैंक से लोन लेकर उसे वापस नहीं करती, तो उसे बैड लोन या नॉन परफॉर्मिंग एसेट या NPA कहा जाता है। यानी इन लोन्स की रिकवरी की उम्मीद काफी कम होती है। नतीजतन बैंकों का पैसा डूब जाता है और बैंक घाटे में चला जाता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक, अगर किसी बैंक लोन की किस्त 90 दिनों तक यानी तीन महीने तक नहीं चुकाई जाती है, तो उस लोन को NPA घोषित कर दिया जाता है। अन्य वित्तीय संस्थाओं के मामले में यह सीमा 120 दिन की होती है। बुक को क्लियर करने के लिए बैंकों को ऐसा करना होता है।

पाकिस्तान में पेट्रोल 5.44 और डीजल 31.05 रुपया महंगा:पेट्रोल 316.15 और हाई-स्पीड डीजल 354.35 रुपया लीटर मिल रहा, नई कीमतें 18 जुलाई से लागू

पाकिस्तान में पेट्रोल 5.44 और डीजल 31.05 रुपया महंगा:पेट्रोल 316.15 और हाई-स्पीड डीजल 354.35 रुपया लीटर मिल रहा, नई कीमतें 18 जुलाई से लागू

पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल के दाम में 5.44 रुपया (पाकिस्तानी रुपया) प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल में 31.05 रुपया प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 316.15 रुपया और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 354.35 रुपया लीटर हो गई है। नई कीमतें 18 जुलाई से लागू हो गई हैं। इसके अलावा सरकार ने अब पेट्रोल-डीजल की कीमतें साप्ताहिक की जगह रोजाना तय करने का फैसला किया है। फरवरी से शुरू हुआ था बढ़ने का सिलसिला हालिया बढ़ोतरी के बावजूद दोनों ईंधन अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई (पीक लेवल) से नीचे बने हुए हैं। 3 अप्रैल को डीजल की कीमत 520.35 रुपया प्रति लीटर के ऑल-टाइम हाई स्तर पर पहुंच गई थी। ईंधन की कीमतों में यह तेजी 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद देखने को मिली थी, जब डीजल 281 रुपया प्रति लीटर के स्तर पर था। वहीं दूसरी ओर, पेट्रोल की कीमत भी 3 अप्रैल को 458.41 रुपया के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी, जिसकी शुरुआत मार्च के पहले हफ्ते में 266 रुपया प्रति लीटर से हुई थी। अब हर रोज तय होंगे दाम पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच जंग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बदल रही हैं। इसे देखते हुए केंद्रीय कैबिनेट और प्रधानमंत्री ने फैसला किया है कि अब ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (OGRA) को रोजाना कीमतें तय करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। OGRA न सिर्फ अपनी वेबसाइट पर रोज सुबह नए रेट जारी करेगी, बल्कि यह भी सार्वजनिक करेगी कि पेट्रोल पंप तक पहुंचते-पहुंचते टैक्स, मार्जिन और अन्य खर्चों की वजह से कीमतें किस तरह तय हुईं। इससे पहले मार्च की शुरुआत से सरकार हर हफ्ते कीमतों की समीक्षा कर रही थी। एक लीटर तेल पर 105 रुपया तो सिर्फ टैक्स, डीलर्स ने दी आंदोलन की चेतावनी आम जनता को मिलने वाले पेट्रोल-डीजल पर सरकार भारी-भरकम टैक्स वसूल रही है। इस समय दोनों पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर प्रति लीटर लगभग 105 रुपया का टैक्स लिया जा रहा है। इसमें कस्टम ड्यूटी, पेट्रोलियम लेवी, क्लाइमेट सपोर्ट लेवी और इनलैंड फ्रेट इक्वलाइजेशन मार्जिन शामिल हैं। दूसरी ओर, ऑल पाकिस्तान डीलर्स एसोसिएशन ने सरकार के 'डेली प्राइसिंग' यानी रोज दाम बदलने के फैसले को सिरे से खारिज कर दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि रोज दाम बदलने से उनके बिजनेस और स्टॉक मैनेजमेंट में दिक्कतें आएंगी। डीलर्स ने चेतावनी दी है कि वे इसके खिलाफ अगले हफ्ते एक बड़ा विरोध प्रदर्शन और हड़ताल कर सकते हैं। मिडिल क्लास और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर पेट्रोल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर देश के मिडिल और लोअर-मिडिल क्लास पर पड़ता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से प्राइवेट गाड़ियों, छोटी कारों, ऑटो रिक्शा और टू-व्हीलर्स में होता है। वहीं, डीजल महंगा होने से पूरे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा है, क्योंकि इसका इस्तेमाल भारी कमर्शियल वाहनों (ट्रकों-बसों), पावर प्लांट्स और बड़े जनरेटरों में होता है। पाकिस्तान में हर महीने करीब 7 से 8 लाख टन पेट्रोल और डीजल की भारी-भरकम बिक्री होती है, जबकि केरोसिन (मिट्टी के तेल) की मासिक मांग सिर्फ 10 हजार टन ही है। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल सरकार के लिए रेवेन्यू जुटाने का सबसे बड़ा जरिया बने हुए हैं।

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