
ज्योतिष शास्त्र में सबसे प्रभावशाली माने जाने वाले ग्रह शनि देव 26 जुलाई से वक्री होने जा रहे हैं, यानी इस दिन से शनि की उल्टी चाल शुरू होगी, जो लगभग 140 दिनों तक चलेगी। न्याय, धर्म और अध्यात्म के कारक शनि की इस बदली चाल का असर देश-दुनिया समेत सभी 12 राशियों पर देखने को मिलेगा। इन राशियों को रहना होगा सतर्क ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, शनि के वक्री होने पर मेष राशि के लोगों में तनाव और एंग्जाइटी बढ़ सकती है। ऐसे में बेवजह अधिक सोचने से बचने की सलाह दी गई है। वहीं मीन राशि के जातकों को जल्दबाजी से बचते हुए शांत मन से निर्णय लेने चाहिए। वृषभ, सिंह और मकर राशि के लिए शुभ संकेत वहीं वृषभ, सिंह और मकर राशि के लोगों के लिए यह समय लाभदायक माना जा रहा है। करियर, कार्यक्षेत्र और नई योजनाओं में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना जताई गई है। देश-दुनिया पर भी पड़ सकता है असर ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डिब्बेवाला के मुताबिक, शनि करीब 135 से 140 दिन में अपनी चाल बदलते हैं। उनका कहना है कि इस बार शनि के वक्री होने का असर वैश्विक राजनीति, विदेश नीति और कूटनीतिक समझौतों पर दिखाई दे सकता है। देशों में सीमा सुरक्षा, आंतरिक विकास और संसाधनों को मजबूत करने पर अधिक ध्यान दिया जा सकता है। उनके अनुसार भारत के लिए यह समय शोध और नई उपलब्धियों के लिहाज से शुभ माना जा रहा है। प्राकृतिक असंतुलन की भी आशंका ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान अत्यधिक बारिश, भूस्खलन, भूकंप जैसी प्राकृतिक घटनाओं की संभावना भी बढ़ सकती है। हालांकि यह ज्योतिषीय आकलन है और इसे वैज्ञानिक पूर्वानुमान नहीं माना जाता। क्या होता है शनि का वक्री होना? खगोल विज्ञान के अनुसार, शनि वास्तव में उल्टी दिशा में नहीं चलता। पृथ्वी सूर्य के अधिक निकट होने के कारण शनि की तुलना में तेज गति से अपनी कक्षा में घूमती है। जब पृथ्वी शनि को ओवरटेक करती है, तब पृथ्वी से देखने पर शनि कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलता हुआ दिखाई देता है। इसी आभासी स्थिति को वक्री कहा जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शनि के अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय ये खबर भी पढ़ें… 7 साल बाद सावन की तीसरी सवारी और नागपंचमी साथ भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में इस बार सावन में दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है। 17 अगस्त को सावन की तीसरी सवारी और नागपंचमी एक ही दिन पड़ रही है। इसी दिन साल में सिर्फ एक बार खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट भी श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। दोनों बड़े आयोजन एक साथ होने से महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। पढ़ें पूरी खबर…

मध्य प्रदेश में मानसून की बेरुखी से बारिश के ओवरऑल आंकड़े में गिरावट आ रही है। प्रदेश में अब तक औसत 9.7 इंच पानी गिरा है, जो सामान्य बारिश से 15% कम है। बीता सप्ताह सूखा रहा। अब अगले सप्ताह से उम्मीद है। बता दें कि इस बार मानसून 9 दिन देरी से 24 जून को पहुंचा था और अगले नौ दिन में पूरे प्रदेश को कवर कर लिया। देरी की वजह से प्रदेश में जून महीने में 30 प्रतिशत बारिश कम हुई थी, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में ये आंकड़ा प्लस में 8 प्रतिशत पर आ गया। दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर रहा। कहीं भी भारी बारिश नहीं हुई। इस वजह से औसत आधा इंच पानी भी नहीं गिरा। इस वजह से जुलाई भी सूखा ही बीत रहा है। 1.7 इंच बारिश कम IMD (मौसम केंद्र) भोपाल की माने तो प्रदेश में अब तक औसत 11.4 इंच बारिश होनी थी, लेकिन यह 9.7 इंच ही हुई। इस तरह 1.7 इंच पानी कम गिरा है। हालांकि, यह कोटे की कुल 25 प्रतिशत है। देवास में सबसे ज्यादा, आलीराजपुर में सबसे कम अबकी बार पश्चिमी हिस्से में बारिश की सबसे अच्छी स्थिति है। खासकर मालवा-निमाड़ यानी, इंदौर-उज्जैन संभाग के जिलों में अच्छा पानी बरसा है। उज्जैन संभाग के देवास जिले में सबसे ज्यादा 17.9 इंच बारिश हुई है, जो कोटे की 50 प्रतिशत से ज्यादा है। वहीं, आलीराजपुर में सिर्फ 2.3 इंच बारिश ही हुई है। यानी, कोटे की करीब 7 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है। इन जिलों की अच्छी-बुरी स्थिति कम बारिश वाले 39 जिले- अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, दतिया, धार, गुना, झाबुआ, मुरैना, नर्मदापुरम, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी और विदिशा। ज्यादा बारिश वाले 16 जिले- निवाड़ी, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, देवास, ग्वालियर, हरदा, इंदौर, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, सीहोर और उज्जैन। डैम-नदियों में भी पानी की कमी बारिश का दौर थमने से डैम और नदियों में पानी कम हो गया है। पिछले सप्ताह से नर्मदा, लखुदंर समेत कई नदियों में पानी आ गया था। लखुंदर नदी तो आगर जिले में ओवरफ्लो हो रही थी। वहीं, सीहोर से निकली कोलांस नदी भी उफान पर रही, लेकिन बारिश नहीं होने से नदियां फिर से सूख रही है। ऐसे समझें बारिश का गणित… सबसे ज्यादा बारिश वाले जिले मध्यप्रदेश में कैसा रहेगा यह सप्ताह? मौसम एक्सपर्ट शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि मौसम विज्ञान की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण संकेत अगले सप्ताह के लिए मिल रहे हैं। वर्तमान निम्न दाब क्षेत्र के कमजोर होने के बाद विभिन्न वैश्विक मौसम मॉडल यह संकेत दे रहे हैं कि 20 से 22 जुलाई के बीच उत्तर या उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में एक नया निम्न दाब क्षेत्र विकसित होने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो सकती हैं। इसका मध्य प्रदेश के साथ ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी असर रहेगा। इसके बाद पूरे प्रदेश में अच्छी बारिश होने के संकेत है। 5 बड़े शहरों में ऐसा रहेगा मौसम भोपाल: भोपाल में कोटे का 34 प्रतिशत यानी, 12.9 इंच पानी गिर चुका है। हालांकि, पिछले एक सप्ताह से यही स्थिति है, लेकिन बारिश के लिहाज से अगला सप्ताह बेहतर रह सकता है। संभाग के सीहोर और राजगढ़ में भी एक तिहाई बारिश हुई है, जबकि विदिशा में सबसे 24 प्रतिशत पानी गिरा है। इंदौर: बारिश के मामले में इंदौर की स्थिति फिलहाल बेहतर है। यहां करीब 14 इंच बारिश हुई है। बुरहानपुर, खंडवा और खरगोन में भी 10 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है, लेकिन आलीराजपुर प्रदेश में सबसे नीचे है। यहां 2.3 इंच बारिश ही हुई है। जबलपुर: जबलपुर में अब तक 9 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। यह कोटे की 25 प्रतिशत ही है। यहां तेज बारिश का दौर फिलहाल थमा हुआ है। उज्जैन: उज्जैन में कोटे की 33.5 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। 11.7 इंच बारिश होने से काफी राहत मिली है। संभाग का देवास प्रदेश में सबसे आगे है। यहां करीब 18 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है, जो कोटे से 50 प्रतिशत तक है। रतलाम, शाजापुर, मंदसौर, नीमच और आगर-मालवा में 9 इंच से ज्यादा पानी गिरा है। ग्वालियर: इस बार भी ग्वालियर-चंबल संभाग में मानसून सबसे लेट पहुंचा। फिर भी बारिश के आंकड़े राहत दे रहे हैं। दतिया और शिवपुरी को छोड़ दें तो बाकी जिलों में 25 प्रतिशत से ज्यादा बारिश हो चुकी है। अगले सप्ताह से यहां भी तेज बारिश का दौर शुरू होगा।

जम्मू-कश्मीर के पुंछ और किश्तवाड़ में शनिवार रात बादल फट गए। बाढ़-लैंडस्लाइड में अब तक 11 लोगों की मौत हो गई है। पुंछ के सुरनकोट में लैंडस्लाइड से एक मकान मलबे में दब गया। उस वक्त घर में 8 लोग थे। इनमें 2 साल के बच्चे समेत 5 लोगों के शव बरामद किए गए। किश्तवाड़ के सुर्नू इलाके में बादल फटने से लोगों के घरों और खेतों को नुकसान पहुंचा। राजौरी में भी भारी बारिश के बाद धारहाल नदी का जलस्तर बढ़ गया। करीब 200 से 250 गाड़ियां बह गईं। उत्तराखंड में शनिवार को लैंडस्लाइड के बाद केदारनाथ यात्रा के रूट पर घोड़े- खच्चरों की सेवाएं रोक दी गईं और कैलाश-मानसरोवर यात्रियों का एक जत्था भी रुक गया। 19 जुलाई को देश के ऊपर छाए बादलों की सैटेलाइट इमेज… देशभर के मौसम से जुड़ी तस्वीरें… अरुणाचल में बाढ़ से डेढ़ लाख प्रभावित, केदारनाथ रूट पर लैंडस्लाइड अरुणाचल में बाढ़ और भूस्खलन के इस दौर में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है, 29 लोग घायल हुए हैं और 1,49,257 लोग प्रभावित हुए हैं। मानसून की मार से कुल 26 जिले, 328 सर्कल और 576 गांव प्रभावित हुए हैं। इधर, पिथौरागढ़ में, कैलाश-मानसरोवर यात्रा का चौथा जत्था, जिसमें 50 तीर्थयात्री शामिल हैं धारचूला बेस कैंप में रोक दिया गया है। बेस कैंप के इंचार्ज धन सिंह बिष्ट ने बताया कि गरबाधार में भूस्खलन के कारण गुंजी जाने वाला रास्ता बंद हो गया है। देशभर के मौसम से जुड़े अडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। 'बात खरी है' मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। हेलिकॉप्टर में बैठने के लिए दौड़े मंत्री मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हेलिकॉप्टर में बैठने के लिए मंत्री दिलीप अहिरवार ने दौड़ लगा दी। इसका वीडियो सामने आया है। अब लोग इसे चटकारे लेकर शेयर कर रहे हैं। वाकया टीकमगढ़ का है। यहां आयोजित कार्यक्रम के बाद सीएम डॉ. मोहन यादव को खजुराहो के लिए रवाना होना था। वे हेलिपैड पर पहुंच चुके थे, लेकिन मंत्री दिलीप अहिरवार काफिले में पीछे रह गए थे। उन्हें भी सीएम के साथ जाना था। सीएम हेलिकॉप्टर में बैठ चुके थे। हेलिकॉप्टर का दरवाजा भी बंद हो गया था और उसके पंखे घूमने लगे थे। हेलिकॉप्टर उड़ान भरने के लिए तैयार था। तभी 'आज कुछ तूफानी करते हैं' वाले अंदाज में मंत्री दिलीप अहिरवार की एंट्री हुई। वे दौड़ लगाते हुए हेलिकॉप्टर तक पहुंचे और आखिरकार उसमें सवार हो ही गए। खरी बात ये है कि राजनीति में भी ऊंची उड़ान भरने के लिए ऐसी ही टाइमिंग और रनिंग जरूरी होती है। मंत्री दिलीप अहिरवार ने इसका शानदार डेमो दे दिया। सिंधिया ने पत्नी के लिए लीं चूड़ियां केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक दिलचस्प वीडियो सामने आया है। इसमें वे अपनी पत्नी के लिए पीले रंग की चूड़ियां लेते नजर आ रहे हैं। खास बात यह रही कि चूड़ियां लेते समय उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा- ये मेरी हाईकमान के लिए। उनकी यह बात सुनकर वहां मौजूद लोग भी मुस्कुरा उठे। दरअसल, सिंधिया अशोकनगर में आयोजित आजीविका मिशन के एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने वहां लगे स्टॉलों का अवलोकन किया और महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की जानकारी ली। उनकी नजर चूड़ियों के एक स्टॉल पर पड़ी। वे वहां रुके और स्टॉल संचालित कर रही महिला सपना से बातचीत की। साथ ही चूड़ियां पसंद आने पर पत्नी के लिए गिफ्ट के रूप में ले लीं। खरी बात ये है कि राजनीति में लंबे समय से रंग जमा चुके सिंधिया अच्छी तरह जानते हैं कि अगर घर की "हाईकमान" खुश रहे, तो सब खुश रहते हैं। विजयवर्गीय बोले- मैं सठिया गया हूं ‘मैं 70 साल का हो गया हूं। यूं ही सठिया गया हूं।’ इंदौर के एक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जैसे ही यह बात कही, वहां मौजूद लोग ठहाके लगाने लगे। दरअसल, मंत्री विजयवर्गीय कह रहे थे कि मैं जो भी करता हूं, मुंह पर करता हूं। पीठ पीछे नहीं। जो गलत है, वो गलत है और जो सही है, वो सही है। किसी को बुरा लगे तो लगे, अपने को क्या फर्क पड़ता है। अब सवाल यह है कि आखिर उनका यह संदेश किसके लिए था। उनके इस बयान के राजनीतिक मायने भी तलाशे जा रहे हैं। इसकी वजह यह है कि हाल ही में कैलाश विजयवर्गीय सरकार में अपनी उपेक्षा का दर्द जाहिर कर चुके हैं। खरी बात ये है कि विजयवर्गीय के बयान अक्सर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन जाते हैं। ऐसे में उनका यह बेबाक अंदाज एक बार फिर नई अटकलों को जन्म दे गया। मंत्री ने बात समझाने लैब सजा दी नेताओं पर कोई कुछ आरोप लगा दे तो देखने में आता है कि वे भी पलटवार करते हैं। प्रत्यारोप करते हैं, सफाई देते हैं, तथ्य रखते हैं लेकिन मंत्री प्रतिमा बागरी ने तो पूरी लैब सजा दी। फिर 'ड्रिंक' वाला एक्सपेरिमेंट कर जवाब दिया। मामला उनकी जाति से जुड़े विवाद का है, जिसमें जांच कमेटी ने माना कि मंत्री प्रतिमा बागरी अनुसूचित वर्ग से ही आती हैं। उनका जाति प्रमाण पत्र एकदम सही है। मंत्री ने अपनी बात समझाने के लिए तीन ग्लास लिए। एक में चाय, दूसरे में कॉफी और तीसरे में ग्रीन टी ली। फिर उन्हें अलग-अलग रॉयल स्टैग के ग्लास में भर दिया। मंत्री ने बताया कि अगर वे नहीं बताएं कि इसमें क्या है, तो ये कोई नहीं बता पाएगा। मंत्री ने बताया कि क्या इन पेय पदार्थों को दूसरे ग्लास में शिफ्ट करने से इनकी परिभाषा बदल जाएगी। क्या प्रतिमा बागरी पर आरोप लगाने से उनकी परिभाषा बदल जाएगी। मंत्री ने बताया कि उन पर लगे आरोप भी कुछ ऐसे ही हैं। अब मंत्री का अपनी बात समझाने का ये तरीका चर्चा का विषय बना हुआ है। और अब अंदर की बात.. सुपरवाइजर ने करा दिया नुकसान एक सरकारी भवन के सुपरवाइजर की हठधर्मिता की वजह से सरकार को हजारों रुपए का नुकसान हो गया। अब ये नुकसान वन टाइम नहीं है, बल्कि हर बार ही सरकार को हजारों रुपए की चपत लगने वाली है। दरअसल, राजधानी में एक सरकारी भवन है, जो निजी संस्थाओं को कार्यक्रम के आयोजन के लिए किराए पर दिया जाता है। सत्ता से बेहद नजदीकी रखने वाला एक संगठन हर बार यहां कार्यक्रम का आयोजन करता आ रहा है। इसके लिए ये संगठन बाकायदा किराया देता था और रसीद भी कटवाता था। कुछ दिन पहले ऐसे ही एक कार्यक्रम के दौरान संगठन से जुड़े पदाधिकारियों ने इस भवन के सुपरवाइजर से मंच पर रखी टेबल हटाने के लिए कहा, तो सुपरवाइजर ने इनकार कर दिया। फिर क्या था, इसकी शिकायत सरकार से की गई। सरकार ने सरकारी भवन का संचालन करने वाले विभाग के एमडी से कहा। एमडी ने सुपरवाइजर को डांटने के साथ ये भी कहा कि अब इनसे किराया मत लेना। इनपुट सहयोग- शैलेंद्र द्विवेदी (टीकमगढ़), संजीव यादव (अशोकनगर), संतोष शितोले (इंदौर), प्रशांत द्विवेदी (सतना)। बात खरी है का ये एपिसोड भी पढ़ें… भाजपा विधायक की शपथ- मैं नशा करूंगा: कांग्रेस विधायक बोले- गद्दारों का मुंह काला करके भेजूंगा सिंगरौली में भाजपा विधायक रामनिवास शाह एक कार्यक्रम में नशा मुक्ति की शपथ दिला रहे थे, लेकिन उन्होंने नशा न करने की बजाय नशा करने की शपथ दिला दी। विधायक ने शपथ दिलाते हुए कहा- ‘मैं शपथ लेता हूं कि.. मैं जीवन में.. कभी नशा करूंगा..।’ दरअसल, वे 'नहीं' शब्द बोलना भूल गए। पढ़ें पूरी खबर…

मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना में अगले 24 घंटे के अंदर भारी बारिश का अलर्ट है। वहीं, जबलपुर-ग्वालियर समेत 34 जिलों में बूंदाबांदी हो सकती है। भोपाल, इंदौर-उज्जैन में मौसम साफ रहेगा। उधर, तेज बारिश के लिए प्रदेश में टोने-टोटके का दौर भी जारी है। शनिवार को भोपाल में गधे को गुलाब जामुन खिलाए गए। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के आसपास चार साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवात) और एक ट्रफ एक्टिव है। इस वजह से शनिवार को भोपाल, नर्मदापुरम समेत कई जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हुई। ऐसा ही मौसम रविवार को भी बना रहेगा। आज छतरपुर-पन्ना में भारी बारिश का अलर्ट है तो रायसेन, विदिशा, नर्मदापुरम, बैतूल, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, दमोह, टीकमगढ़ और निवाड़ी में बूंदाबांदी हो सकती है। वहीं, भोपाल, राजगढ़, सीहोर, हरदा, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर और देवास में मौसम के साफ रहने का अनुमान है। मैप से समझें, 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम जुलाई में अब तक सामान्य से 15% कम बारिश मध्य प्रदेश में पिछले 9 दिन में किसी भी जिले में भारी या अति भारी बारिश दर्ज नहीं की गई है। इस वजह से सामान्य बारिश का आंकड़ा लगातार कम हो रहा है। शनिवार तक यह आंकड़ा सामान्य से 15 प्रतिशत कम हो गया। प्रदेश में अब तक 247 मिमी बारिश हो चुकी है, जो सामान्य बारिश के 291 मिमी से 15% कम है। दूसरी ओर, पूर्वी हिस्से के जिलों में 26 प्रतिशत पानी कम गिरा है। वहीं, पश्चिमी हिस्से में भी 5% कम बारिश दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38-39 इंच तक है। जून के बाद जुलाई में भी आंकड़ा कम मौसम विभाग के अनुसार, जून में कम बारिश हुई लेकिन जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह आंकड़ा बढ़ गया। बाद में लगातार 9 दिन से तेज बारिश नहीं होने से आंकड़ा माइनस में आ गया है। बता दें कि जुलाई में इस महीने पूरे मानसून की एक तिहाई बारिश का ट्रेंड है। जैसे- भोपाल में 39 इंच सामान्य बारिश है तो 14 इंच बारिश जुलाई में होती है। बड़े शहरों में जबलपुर ही ऐसा है, जहां सबसे ज्यादा 17 इंच से ज्यादा बारिश होती है। जुलाई के महीने में ही प्रदेश में कोटे की 40 प्रतिशत तक बारिश होती है। देवास में 18 इंच पानी गिरा, आलीराजपुर में सबसे कम प्रदेश में देवास सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला है। यहां 102 प्रतिशत ज्यादा पानी गिर चुका है। मौसम विभाग के आंकड़ों की मानें तो यहां अब तक 18 इंच बारिश हो चुकी है। इंदौर-सीहोर में 14 इंच बरसात हुई है। हरदा में 15 इंच पानी गिर चुका है। वहीं, भोपाल में 13.1 इंच पानी गिरा है। आगर-मालवा, अशोकनगर, बैतूल, बुरहानपुर, गुना, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर, उज्जैन, विदिशा, अनूपपुर, बालाघाट, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, मंडला, पांढुर्णा, पन्ना, सागर, सिवनी और उमरिया जिले भी बेहतर स्थिति में है। आलीराजपुर में सबसे कम सवा 2 इंच ही बारिश हुई है, जो सामान्य से 74 प्रतिशत कम है। जुलाई में MP के 5 बड़े शहरों में ऐसा ट्रेंड इंदौर में 24 घंटे में 11.5 इंच बारिश का रिकॉर्ड इंदौर की बात करें तो 24 घंटे में 11.5 इंच बारिश होने का रिकॉर्ड है, जो 27 जुलाई 1913 को हुई थी। वर्ष 1973 में पूरे महीने 30.5 इंच पानी गिरा था। बारिश के चलते यहां भी तापमान में गिरावट देखने को मिलती है। इंदौर में महीने की एवरेज बारिश 12 इंच है। जुलाई में सामान्य तौर पर 13 दिन यहां बारिश होती है। भोपाल में जुलाई में एवरेज 15 दिन बारिश होती है भोपाल में जुलाई में खूब बारिश होती है। यहां एक ही महीने में 1031.4 मिमी यानी 41 इंच के करीब बारिश होने का रिकॉर्ड है। यह साल 1986 में हुई थी। 22 जुलाई 1973 को एक ही दिन में 11 इंच बारिश हुई थी, जो अब तक का रिकॉर्ड है। भोपाल में जुलाई में एवरेज 15 दिन बारिश होती है यानी, हर दूसरे दिन पानी बरसता है। महीने की एवरेज बारिश 367.7 मिमी यानी 14.4 इंच है। बारिश के चलते दिन का तापमान 30 और रात में पारा 25 डिग्री सेल्सियस से कम रहता है। जबलपुर में पिछले साल 13 इंच से ज्यादा पानी गिरा प्रदेश के 5 बड़े शहरों में जबलपुर ऐसा है, जहां सबसे ज्यादा बारिश होती है। वर्ष 1930 में यहां करीब 45 इंच पानी बरसा था जबकि 30 जुलाई 1915 को 24 घंटे की सर्वाधिक 13.5 इंच बारिश हुई थी। पिछले साल जुलाई में 13 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। 2013 और 2016 में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी। जबलपुर में जुलाई की सामान्य बारिश 17 इंच है। महीने में 15 से 16 दिन पानी बरसता है। ग्वालियर में 6 बार 8 इंच से कम बारिश हुई भोपाल, इंदौर और जबलपुर की तुलना में ग्वालियर में सबसे कम बारिश होती है। पिछले 10 साल में 6 बार ऐसा हुआ, जब 8 इंच से कम पानी गिरा हो जबकि यहां की एवरेज बारिश 9 इंच के करीब है। ग्वालियर में वर्ष 1935 में महीने की सबसे ज्यादा बारिश हुई थी। तब 623.3 मिमी यानी 24.5 इंच बारिश दर्ज की गई थी। 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश की बात करें तो 12 जुलाई 2015 को 190.6 मिमी यानी साढ़े 7 इंच पानी बरसा था। ग्वालियर में जुलाई के महीने में एवरेज 11 दिन बारिश होती है। उज्जैन में जमकर होती है बारिश मध्य प्रदेश के अन्य शहरों की तरह उज्जैन में भी जुलाई में जमकर बारिश होती है। कोटे की करीब 40 प्रतिशत बारिश इसी महीने हो जाती है। ये खबर भी पढ़ें… संडे मानसून अपडेट: MP के 39 जिलों में कम बारिश मध्य प्रदेश में मानसून की बेरुखी से बारिश के ओवरऑल आंकड़े में गिरावट आ रही है। प्रदेश में अब तक औसत 9.7 इंच पानी गिरा है, जो सामान्य बारिश से 15% कम है। बीता सप्ताह सूखा रहा। अब अगले सप्ताह से उम्मीद है। बता दें कि इस बार मानसून 9 दिन देरी से 24 जून को पहुंचा था और अगले नौ दिन में पूरे प्रदेश को कवर कर लिया था। पढ़ें पूरी खबर…

डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना और स्पेन के बीच आज फुटबॉल वर्ल्ड कप का फाइनल खेला जाएगा। रात 12:30 बजे शुरू होने वाले इस मैच पर दुनिया भर के खेल प्रेमियों की नजर हैं। न्यूयॉर्क में होने वाले इस मैच से पहले भास्कर ने भारत के स्पोर्ट्स स्टार्स के मन का हाल जाना। हमने पूर्व भारतीय कप्तान बाईचुंग भूटिया, दिग्गज निशानेबाज गगन नारंग और मुक्केबाज निखित जरीन से वर्ल्ड कप से जुड़े 4 सवाल पूछे।

भारत और इंग्लैंड के बीच सीरीज का तीसरा और आखिरी वनडे आज लॉर्ड्स में खेला जा रहा है। इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी है। टीम इंडिया में तीन बदलाव हुए हैं। घुटने की चोट के कारण जसप्रीत बुमराह इस मैच में नहीं खेल रहे हैं। दोनों टीमें सीरीज में 1-1 की बराबरी पर हैं। इंग्लैंड ने 3 ओवर के बाद बिना किसी नुकसान के 27 रन बना लिए हैं। बेन डकेट और जैकब बेथेल क्रीज पर हैं। मैच का स्कोरकार्ड… प्लेइंग-11 भारत: रोहित शर्मा, शुभमन गिल (कप्तान), विराट कोहली, ईशान किशन (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर, केएल राहुल, अक्षर पटेल, गुरनूर बरार, प्रिंस यादव, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा। इंग्लैंड: बेन डकेट, जैकब बेथेल, जो रूट, हैरी ब्रूक (कप्तान), जोस बटलर (विकेटकीपर), सैम करन, विल जैक्स, गस एटकिंसन, जोफ्रा आर्चर, जोश टंग, आदिल रशिद।

री-नीट के नतीजों के बाद भी छात्रों के बीच भारी असंतोष है। OMR शीट और जारी मार्कशीट के अंकों में बड़ा अंतर होने से विवाद खड़ा हो गया है। ऐसा एक या दो नहीं, बल्कि कई छात्रों के साथ हुआ है। छात्रों का कहना है कि उन्होंने जब अपनी OMR शीट का मिलान ‘फाइनल आंसर-की’ से किया, तो उनके अंक काफी अधिक थे, लेकिन मार्कशीट में नंबर अचानक घट गए। कई छात्रों के अंक 15 से लेकर 600 तक कम हो गए हैं। इस वजह से वे छात्र जो OMR के अनुसार परीक्षा पास कर रहे थे, अब वे ‘क्वालिफाई’ भी नहीं कर पा रहे हैं। विवाद का मुख्य कारण नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की जल्दबाजी मानी जा रही है। एजेंसी ने फाइनल आंसर-की जारी करने के महज 3-4 घंटे बाद ही रिजल्ट घोषित कर दिया। NTA ने 16 जुलाई की देर रात नीट का रिजल्ट जारी किया था। इस साल करीब 20 लाख स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी थी, जिनमें से 11.21 लाख स्टूडेंट्स मेडिकल, डेंटल, AYUSH और अन्य मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए क्वालिफाई हुए हैं। 2020 और 2021 के बाद पहली बार कोई भी छात्र 720 का परफेक्ट स्कोर हासिल नहीं कर पाया। न्याय के लिए हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे छात्र अभिभावक और छात्र इसे बड़ी लापरवाही मान रहे हैं। डॉ. राजेश कुमार सिंह जैसे अभिभावकों ने एनटीए को पत्र लिखकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है और वे अब न्याय के लिए हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, एनटीए ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा- हम सभी शिकायतों की जांच कर रहे हैं। छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे जांच के लिए केवल मूल ओएमआर ही जमा करें। फर्जी/एआई जनरेटेड ओएमआर के मामले में शिकायतकर्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।’ हरियाणा में एक ही छात्र के दो अलग रिजल्ट नीट रिजल्ट को लेकर एक और चौंकाने वाला मामला हरियाणा से सामने आया है। हरियाणा के अभ्यर्थी मुकुल काजल ने एनटीए के महानिदेशक को शिकायत भेजकर आरोप लगाया है कि उनके स्कोरकार्ड में बिना किसी सूचना के बड़ा फेरबदल कर दिया गया। इसे दुरुस्त कराया जाए। शिकायत के अनुसार, 17 जुलाई 2026 को आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड किए गए स्कोरकार्ड में मुकुल के 605/720 अंक (ऑल इंडिया रैंक 9551) दर्ज थे। लेकिन महज कुछ घंटों बाद 18 जुलाई की सुबह जब दोबारा स्कोरकार्ड डाउनलोड किया गया, तो उनके अंक घटकर सिर्फ 60/720 अंक दिखाए। इससे मुकुल की ऑल इंडिया रैंक घटकर 18,76,324 हो गई। छात्र का दावा है कि उनके पास 17 जुलाई का मूल स्कोरकार्ड सुरक्षित है। साथ ही, ओएमआर रिस्पॉन्स शीट और एनटीए की फाइनल आंसर-की के मिलान से भी उनका स्कोर 605 अंक ही बनता है। ------------------------------- नीट से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… NEET में सफल होने वालों में करीब आधे OBC:हर दूसरा सफल छात्र इसी वर्ग से; SC परीक्षार्थी 63% और EWS 76% बढ़े NEET 2026 के नतीजों में मेडिकल शिक्षा के सामाजिक-शैक्षणिक रुझानों में बड़ा बदलाव दिखा है। इस साल परीक्षा देने वालों में OBC सबसे बड़ा वर्ग रहा। कुल रजिस्ट्रेशन में OBC की हिस्सेदारी 41.8% थी, जबकि क्वालिफाई करने वालों में यह बढ़कर 45.7% हो गई। यानी लगभग हर दूसरा सफल छात्र OBC वर्ग से है। पूरी खबर पढ़ें…

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा- सोनम वांगचुक 17-18 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। इस मामले में डिवीजन बेंच पहले ही आदेश दे चुकी थी। स्वास्थ्य बिगड़ने और डिवीजन बेंच के आदेश के कारण उन्हें सरकारी अस्पताल ले जाया गया। सरकार ने उन्हें अस्पताल में ले जाने का फैसला किया, तो इस कार्रवाई को मनमाना नहीं कहा जा सकता। वांगचुक को वहीं दवाएं दी जा रहीं, जिसमें उनकी रजामंदी है। दरअसल सोनम की पत्नी गीतांजलि ने वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से प्राइवेट हॉस्पिटल शिफ्ट करने की मांग की थी। मामले में अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी। दिल्ली पुलिस शनिवार सुबह वांगचुक को जंतर-मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। अस्पताल में भी वांगचुक की भूख हड़ताल जारी है। CJP और वांगचुक 28 जून से NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के समर्थन में आमरण अनशन पर हैं। वांगचुक को उठाने के लिए देर रात 1:30 बजे आदेश मिला था दिल्ली पुलिस के आयुक्त अनुराग कुमार के पद संभालने के 24 घंटे में वांगचुक को धरना स्थल से उठवाकर अस्पताल पहुंचा दिया गया। सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार रात 1:30 बजे इसके निर्देश मिले। फिर नई दिल्ली जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंदिर मार्ग थाने में रणनीति बनाई। एक मिनट में बिना टकराव के वांगचुक को कैसे एम्बुलेंस तक ले जाएं, इसकी रिहर्सल की। जैमर लगाने पर भी चर्चा हुई, ताकि कार्रवाई के वीडियो न फैलें। सुबह 5 बजे अधिकारी जंतर-मंतर पहुंचें। वहां अंतिम ब्रीफिंग दी। फिर सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी सफेद चादरें लेकर मंच पर चढ़ गए। कार्रवाई की वीडियोग्राफी से बचने के लिए चादरों का इस्तेमाल किया गया। जंतर-मंतर से विरोध प्रदर्शन की 3 तस्वीरें… वांगचुक की हड़ताल का आज 22वां दिन खबर से जुड़े अपडेट्स पढ़ने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

मध्य प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड, यूसीसी) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रविवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यूसीसी विधेयक-2026 के ड्राफ्ट को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। अब इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा। विधानसभा का सत्र कल से शुरू हो रहा है। कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार विधेयक को विधानसभा में पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है। समानता भारतीय संस्कृति और मूल्यों का अभिन्न हिस्सा रही है। इसी भावना के अनुरूप सरकार ने यह कदम उठाया है। देश में उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य है, जबकि गुजरात और असम में यूसीसी विधेयक पारित हो चुका है। भोपाल के इतिहास का भी किया उल्लेख कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने भोपाल के गौरवशाली इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भोपाल का इतिहास परमार राजवंश और राजा भोज से जुड़ा है। यह क्षेत्र प्राचीन काल से सनातन संस्कृति का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि भोपाल का गहरा संबंध गोंड राजवंश से भी है। मदन शाह और संग्राम शाह जैसे शासकों ने क्षेत्र के विकास में योगदान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा- इतिहास में राजा निजाम शाह की विष देकर हत्या और उसके बाद रानी कमलापति द्वारा अपने पुत्र एवं प्रजा की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष का भी विशेष महत्व है। उन्होंने अफगान सरदार दोस्त मोहम्मद खान के दौर और बाद के शासनकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि भोपाल का इतिहास विभिन्न शासकों और संस्कृतियों से समृद्ध रहा है। अब तक दो राज्यों में UCC बिल पारित, एक में लागू जनवरी 2025: उत्तराखंड UCC लागू करने वाला पहला राज्य 6 फरवरी 2024 को विधानसभा में UCC विधेयक पेश हुआ। 7 फरवरी 2024 को पारित हुआ। 11 मार्च 2024 को राष्ट्रपति ने UCC विधेयक को मंजूरी दी। क्रियान्वयन समिति ने 18 अक्टूबर 2024 को नियमावली सरकार को सौंपी। 20 जनवरी 2025 को नियमावली को कैबिनेट की मंजूरी मिली। इस तरह उत्तराखंड UCC लागू करने वाला पहला राज्य बन गया। मार्च 2026: गुजरात UCC बिल पास करने वाला दूसरा राज्य बना गुजरात विधानसभा में मार्च 2026 में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पास कराया गया था। गुजरात UCC बिल पास करने वाला देश का दूसरा राज्य बना है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया था। विधानसभा में बिल पर वोटिंग के दौरान कांग्रेस ने वॉकआउट कर दिया था। बिल बहुमत से पास हो गया। मई 2026: असम UCC बिल पास करने वाला तीसरा राज्य बना असम विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल 27 मई को पेश किया गया था। यह बिल सदन से पारित भी हो गया। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के मुताबिक अनुसूचित जनजातियां (पहाड़ी) और अनुसूचित जनजातियां (मैदानी) UCC के दायरे से बाहर रहेंगी। साथ ही 'पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों, प्रथाओं और अनुष्ठानों' को भी इससे छूट दी जाएगी। आजाद भारत से पहले गोवा में UCC गोवा में पहले से ही UCC लागू है, लेकिन वहां इसे पुर्तगाली सिविल कोड के तहत लागू किया गया था। उत्तराखंड आजादी के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य है। सन् 1835 में, ब्रिटिश सरकार ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें आपराधिक साक्ष्य और अनुबंधों के संबंध में देश भर में एक समान कानून बनाने का आह्वान किया गया था। इसे सन् 1840 में लागू भी किया गया, लेकिन धर्म के आधार पर हिंदुओं और मुसलमानों के व्यक्तिगत कानूनों को अलग रखा गया। यहीं से समान नागरिक संहिता की मांग शुरू हुई। 1941 में बीएन राव समिति का गठन किया गया था, जिसने हिंदुओं के लिए एक समान नागरिक संहिता बनाने की बात कही थी। आजादी के बाद, हिंदू संहिता विधेयक पहली बार 1948 में संविधान सभा में प्रस्तुत किया गया था। इसका उद्देश्य हिंदू महिलाओं को बाल विवाह, सती प्रथा और बुर्का जैसी गलत प्रथाओं से मुक्त करना था। ……………………………….. यह खबर भी पढ़ें बंगाल में भी UCC लाने की तैयारी: भाजपा ने सरकार बनने के 6 महीने के अंदर लागू करने का वादा किया था पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार 29 जून को विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश करने वाली थी। हालांकि, बिल पेश नहीं हो पाया। भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले अपने संकल्प पत्र में सरकार बनने के छह महीने के भीतर पश्चिम बंगाल में UCC लागू करने का वादा किया था। 9 मई को नई सरकार का गठन हुआ था। पूरी खबर पढ़ें...


ICICI बैंक लिमिटेड ने अप्रैल-जून तिमाही के लिए अपने स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में साल-दर-साल 15.95% की बढ़त दर्ज की है। यह बढ़कर 14,804.5 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। बैंक का यह मुनाफा बाजार के अनुमानों से काफी बेहतर रहा। इस निजी क्षेत्र के बड़े बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी उम्मीद से ज्यादा तेजी से बढ़ते हुए 12.7% की एनुअल ग्रोथ के साथ 24,384.35 करोड़ रुपए रही। बाजार के अनुमानों को पीछे छोड़ा CNBC-TV18 के एनालिस्ट पोल के अनुसार, बाजार को उम्मीद थी कि इस तिमाही में ICICI बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 9% की बढ़त के साथ 23,689 करोड़ रुपए रह सकती है। वहीं, नेट प्रॉफिट में पिछले साल के मुकाबले 7% की ग्रोथ का अनुमान था, जिसके तहत इसके 13,616 करोड़ रुपए रहने की उम्मीद जताई गई थी। बैंक ने मुनाफे और इंटरेस्ट इनकम दोनों ही मामलों में इन अनुमानों को पीछे छोड़ दिया। मार्जिन और एसेट क्वालिटी में सुधार जून तिमाही के दौरान बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में तिमाही और सालाना दोनों आधार पर सुधार देखने को मिला है। इस तिमाही में NIM 4.36% दर्ज किया गया। हालांकि, मार्च तिमाही में यह 4.32% और पिछले साल की समान अवधि में 4.34% के स्तर पर था। इसके साथ ही बैंक की एसेट क्वालिटी को भी और मजबूती मिली है। लोन बुक और डिपॉजिट में 14% की ग्रोथ 30 जून 2026 तक बैंक का कुल लोन पोर्टफोलियो सालाना आधार पर 19.6% की रफ्तार से बढ़कर 16,31,260 करोड़ रुपए हो गया। वहीं कुल डिपॉजिट में भी 14% की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 18,33,586 करोड़ रुपए पर पहुंच गई। इसी तरह औसत डिपॉजिट भी 14% बढ़कर 17,48,028 करोड़ रुपए रहा है, जबकि बैंक का एवरेज कासा (CASA) रेशियो 38.1% दर्ज किया गया है। बैंक को एनपीए के मोर्चे पर राहत मिली 30 जून 2026 तक बैंक का ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) रेशियो घटकर 1.38% पर आ गया है, जो मार्च के अंत में 1.40% और पिछले साल की समान अवधि में 1.67% था। वहीं बैंक का नेट एनपीए रेशियो की बात करें तो यह 0.35% रहा, जो पिछली तिमाही में 0.33% और एक साल पहले 0.41% के स्तर पर था। बैंक ने 2026 में अब तक 8.7% रिटर्न दिया शुक्रवार को ICICI बैंक के शेयर 1.84% की बढ़त के साथ 1,444.3 रुपए पर बंद हुए थे। साल 2026 में अब तक इस स्टॉक ने निवेशकों को 8.7% का रिटर्न दिया है। इसकी तुलना में देखें तो इसी अवधि के दौरान शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 50 में 6.9% की गिरावट दर्ज की गई है, यानी बैंक ने मार्केट के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। क्या होती है नेट इंटरेस्ट इनकम और नेट इंटरेस्ट मार्जिन? नेट इंटरेस्ट इनकम (NII): बैंक मुख्य रूप से दो काम करता है- जमा यानी डिपॉजिट स्वीकार करना और लोन देना। लोन देने पर बैंक को जो ब्याज मिलता है, उसमें से जमाकर्ताओं को दिए जाने वाले ब्याज को घटाने के बाद बची रकम को नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) कहते हैं। यह बैंक की मुख्य कमाई होती है। नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM): यह किसी बैंक की वित्तीय सेहत को मापने का एक पैमाना है। बैंक अपनी कुल ब्याज कमाने वाली संपत्तियों (जैसे लोन) पर जितना ब्याज कमाता है और जमा राशि पर जितना ब्याज चुकाता है, उसके अंतर को प्रतिशत में व्यक्त करने पर इसे नेट इंटरेस्ट मार्जिन कहा जाता है। नॉन परफॉर्मिंग एसेट या NPA क्या है? जब कोई व्यक्ति या संस्था किसी बैंक से लोन लेकर उसे वापस नहीं करती, तो उसे बैड लोन या नॉन परफॉर्मिंग एसेट या NPA कहा जाता है। यानी इन लोन्स की रिकवरी की उम्मीद काफी कम होती है। नतीजतन बैंकों का पैसा डूब जाता है और बैंक घाटे में चला जाता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक, अगर किसी बैंक लोन की किस्त 90 दिनों तक यानी तीन महीने तक नहीं चुकाई जाती है, तो उस लोन को NPA घोषित कर दिया जाता है। अन्य वित्तीय संस्थाओं के मामले में यह सीमा 120 दिन की होती है। बुक को क्लियर करने के लिए बैंकों को ऐसा करना होता है। ये खबर भी पढ़ें… HDFC बैंक का मुनाफा 5% बढ़कर ₹19,060 करोड़: नेट इंटरेस्ट इनकम 6.7% बढ़ी; बैंक के नतीजे एक्सपर्ट्स के अनुमान से कम रहे HDFC बैंक लिमिटेड ने शनिवार को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे घोषित कर दिए हैं। इस तिमाही (Q1 FY27) में बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 4.98% बढ़कर 19,059.72 करोड़ रुपए रहा। हालांकि, यह मुनाफा CNBC-TV18 पोल के 19,332 करोड़ रुपए के अनुमान से कम रहा। पूरी खबर पढ़ें…