भाजपा विधायक संजय पाठक को हाईकोर्ट से राहत, माफी स्वीकार:जस्टिस विशाल मिश्रा को कॉल-मैसेज मामले में भविष्य के लिए दी सख्त चेतावनी
Hitesh SharmaJuly 22, 2026
कटनी जिले के विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक एवं खनन कारोबारी संजय पाठक को जस्टिस विशाल मिश्रा को कॉल और मैसेज करने के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया की खंडपीठ ने आपराधिक अवमानना मामले में उनका बिना शर्त माफीनामा स्वीकार करते हुए उन्हें चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं बननी चाहिए। कोर्ट ने माना कि इस घटनाक्रम से न्यायिक प्रक्रिया में कोई बाधा उत्पन्न नहीं हुई। बुधवार को सुरक्षित फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने भाजपा विधायक संजय पाठक के खिलाफ चल रही आपराधिक अवमानना की कार्रवाई समाप्त कर दी। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी न्यायाधीश से इस तरह संपर्क करने का प्रयास न्यायिक मर्यादा के अनुरूप नहीं है और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। यह मामला हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विशाल मिश्रा को फोन और मैसेज भेजने से जुड़ा था। इस घटनाक्रम पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए संजय पाठक के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू की थी। मामले की अंतिम सुनवाई के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया की खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे बुधवार को सुनाया गया। संजय पाठक ने मांगी थी बिना शर्त माफी पिछली सुनवाई में संजय पाठक ने अदालत में बिना शर्त हलफनामा दाखिल कर अपनी गलती स्वीकार की थी। उन्होंने कहा था कि जस्टिस विशाल मिश्रा को उनसे गलती से कॉल लग गया था। इसके बाद केवल अपना परिचय देने के उद्देश्य से उन्होंने एक संदेश भेजा था। उन्होंने यह भी कहा था कि जज के मोबाइल पर केवल एक सिंगल रिंग का मिस्ड कॉल गया था और इसके लिए वह बिना शर्त माफी मांग चुके हैं। सुनवाई में कोर्ट ने जताई थी आपत्ति मामले में हस्तक्षेपकर्ता आशुतोष मनु दीक्षित की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता आर्यन उरमालिया ने बताया था कि सुनवाई के दौरान कॉल और मैसेज का रिकॉर्ड अदालत के समक्ष उपलब्ध नहीं था। इसके बावजूद अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि केवल कॉल करना अलग बात है, लेकिन उसके बाद मैसेज भेजकर अपना परिचय देना न्यायिक मर्यादा के विपरीत है और प्रथम दृष्टया न्यायालय की अवमानना के दायरे में आता है। क्या था पूरा मामला पूरा घटनाक्रम 1 सितंबर 2025 का है। उस दिन जस्टिस विशाल मिश्रा ने ओपन कोर्ट में बताया था कि एक विधायक ने उनसे संपर्क करने का प्रयास किया था। उसी समय उनके समक्ष विधायक परिवार से जुड़े खनन मामले की सुनवाई लंबित थी। न्यायिक निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जस्टिस मिश्रा ने स्वयं को उस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया था। इसके बाद कटनी निवासी आशुतोष मनु दीक्षित ने इस मामले में याचिका दायर की। 2 अप्रैल 2026 को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि यह न्यायपालिका की गरिमा और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मामला है तथा प्रथम दृष्टया आपराधिक अवमानना का मामला बनता है। इसके बाद अदालत ने संजय पाठक को नोटिस जारी किया था।
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