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अब उमंग एप से एक्टिवेट होगा UAN:फेस ऑथेंटिकेशन भी करना होगा, यहां जानें एक्टिवेट करने की पूरी प्रोसेस

अब उमंग एप से एक्टिवेट होगा UAN:फेस ऑथेंटिकेशन भी करना होगा, यहां जानें एक्टिवेट करने की पूरी प्रोसेस

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO ने अपने करोड़ों सब्सक्राइबर्स के लिए एक बड़ा बदलाव किया है। EPFO ने अब अपनी आधिकारिक वेबसाइट से यूनिवर्सल अकाउंट नंबर यानी UAN एक्टिवेशन और नया UAN जनरेट करने की सुविधा को बंद कर दिया है। अब इन दोनों सर्विसेज को ‘उमंग’ एप पर शिफ्ट कर दिया गया है। इसके साथ ही सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन को जरूरी कर दिया गया है। EPFO के मुताबिक, डेटाबेस कंसॉलिडेशन और सॉफ्टवेयर अपग्रेड के बाद ऑनलाइन सर्विसेज को फास्ट और ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। स्टेटस चेक करने का तरीका UAN एक्टिवेट हुआ है या नहीं, यह चेक करने के लिए उमंग एप में 'UAN Services Through Face Auth' के तहत 'UAN allotment and activation' ऑप्शन पर जाएं। वहां अपना UAN, आधार नंबर और मोबाइल नंबर डालकर कंसेंट बॉक्स को टिक करें और 'Send OTP' पर क्लिक करें। अगर प्रोसेस सफल रहा होगा, तो स्क्रीन पर मैसेज दिखेगा- 'The UAN entered is already activated'। इस साल भी 8.25% मिलेगी ब्याज दर वित्त मंत्रालय ने इस फाइनेंशियल ईयर यानी FY2025-26 के लिए EPF पर 8.25% की ब्याज दर को मंजूरी दे दी है। यह लगातार तीसरा मौका है जब सब्सक्राइबर्स को 8.25% की दर से ब्याज मिल रहा है। पैसे निकालने की लिमिट: 25% बैलेंस मेंटेन करना जरूरी EPFO के नियमों के अनुसार, सब्सक्राइबर्स को अपने EPF अकाउंट में हर समय कम से कम 25% का मिनिमम बैलेंस मेंटेन करना जरूरी होता है। इसका मतलब यह है कि अगर आप नौकरी के दौरान आंशिक रूप से पैसा निकालना चाहते हैं, तो अपने कुल फंड का अधिकतम 75% हिस्सा ही निकाल सकते हैं। फुल सेटलमेंट केवल नौकरी छोड़ने की स्थिति में ही मंजूर किया जाता है। उदहारण के लिए: अगर किसी सब्सक्राइबर के अकाउंट में (कर्मचारी और कंपनी दोनों का हिस्सा मिलाकर) कुल ₹2 लाख जमा हैं, तो वह पार्शियल विड्रॉल के तौर पर अधिकतम ₹1,50,000 ही निकाल सकेगा, जबकि ₹50,000 का मिनिमम बैलेंस अकाउंट में ही रहेगा।

अमेरिका-ईरान युद्ध में अब पानी भी निशाने पर:अमेरिकी हमले में ईरान का वाटर प्लांट तबाह, जवाब में कुवैत के प्लांट पर हमला

अमेरिका-ईरान युद्ध में अब पानी भी निशाने पर:अमेरिकी हमले में ईरान का वाटर प्लांट तबाह, जवाब में कुवैत के प्लांट पर हमला

अमेरिका और ईरान के बीच अब समुद्र के खारे पानी को साफ करने वाले प्लांट्स को निशाना बनाया जा रहा है। ईरान ने शनिवार को दावा किया कि अमेरिका ने होर्मोजगान प्रांत में हवाई हमला कर बोंजी डिसैलिनेशन (वाटर) प्लांट को तबाह कर दिया। इस हमले के बाद 20 गांवों के करीब 10 हजार लोगों की पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। वहीं कुवैत ने कहा कि ईरान ने लगातार दूसरे दिन उसके पानी के प्लांट को निशान बनाया है। कुवैत में पीने का लगभग 90 प्रतिशत खारे पानी को मीठी बनाने की प्रक्रिया (डिसैलिनेशन) से मिलता है। कुवैत की तरफ से कहा गया है कि इसमें किसी भी तरह की रुकावट रेगिस्तान वाले छोटे से देश में जीवन के लिए खतरा पैदा कर सकती है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च कामयाब:स्काईरूट एयरोस्पेस ने खुद बनाकर अंतरिक्ष में भेजा, 2 दोस्तों ने इसरो छोड़कर बनाई थी यह कंपनी

भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च कामयाब:स्काईरूट एयरोस्पेस ने खुद बनाकर अंतरिक्ष में भेजा, 2 दोस्तों ने इसरो छोड़कर बनाई थी यह कंपनी

हैदराबाद की स्काईरूट एयरोस्पेस ने शनिवार 18 जुलाई को भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 लॉन्च किया। यह टेस्ट पहले ही प्रयास में कामयाब रहा। विक्रम-1 को स्काईरूट एयरोस्पेस ने तैयार किया और लॉन्चिंग भी खुद ही की। सिर्फ लॉन्चपैड इसरो का था। स्काईरूट एयरोस्पेस कंपनी की स्थापना 2018 में दो दोस्तों पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका ने की थी। विक्रम-1 को आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा में इसरो के सतीश धवन स्पेस सेंटर से दोपहर 12:05 बजे लॉन्च किया गया। स्काईरूट ने 2022 में विक्रम-एस सब-ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया था, जो 89.5 km की ऊंचाई तक गया था। अब विक्रम-1 450 km की पृथ्वी की सर्कुलर निचली कक्षा तक पहुंच गया है। इसे भारत के स्पेस सेक्टर के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। ऑर्बिटल रॉकेट: जब कोई रॉकेट पृथ्वी के चारों ओर लगातार चक्कर लगाने लायक स्पीड हासिल कर लेता है, तो वह ऑर्बिटल रॉकेट कहलाता है। यह स्पीड लगभग 28,000 किमी/घंटा या 7.8 किमी/सेकंड होती है। सब-ऑर्बिटल रॉकेट: रॉकेट अंतरिक्ष की सीमा तक जाकर लौट आए, तो उसे सब-ऑर्बिटल रॉकेट कहते हैं। आमतौर पर 100 किमी की ऊंचाई पर अंतरिक्ष की शुरुआत मानी जाती है। खबर में आगे बढ़ने से पहले लॉन्च से जुड़ी 4 तस्वीरें… सोने के कलाम, साराभाई और सीवी रमन भी भेजे गए इस लॉन्चिंग को 'मिशन आगमन' नाम दिया गया। इसके तहत विक्रम-1 रॉकेट अपने साथ टेक्नोलॉजी से लेकर कला से जुड़े पेलोड्स अंतरिक्ष में भेजे गए: कॉमर्शियल और टेक्नोलॉजी के ये पेलोड्स भेजे गए 18 कैरेट सोने से बना आर्ट पीस भी स्पेस में भेजा गया कॉस्मोस डायमंड्स की कलाकृति "कॉस्मिक ब्लूम" और एक खास माइक्रो-आर्ट पीस भी रॉकेट में भेजा गया। यह माइक्रो-आर्ट पीस 18 कैरेट सोने से बना छोटा सा रॉकेट है। इस पर वैज्ञानिक सर सीवी रमन, डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. कलाम की सूक्ष्म मूर्तियां उकेरी गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाथ से लिखा गया एक पोस्टकार्ड भी रॉकेट में भेजा गया, जिस पर 'वंदे मातरम' शब्द अंकित हैं। हल्के कार्बन-कंपोजिट से बना है पूरा रॉकेट विक्रम-1 पूरी तरह से हल्के और मजबूत कार्बन-कंपोजिट स्ट्रक्चर से बना पहला ऑर्बिटल रॉकेट है। कार्बन फाइबर स्टील की तुलना में पांच गुना हल्का होता है। इससे रॉकेट का वजन कम हो जाता है, जिससे इसकी ईंधन दक्षता बढ़ जाती है। रॉकेट को ऊर्जा देने के लिए इसमें तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज और एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल दिया गया है। 1. तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज: इसे आप रॉकेट के नीचे लगे तीन बेहद ताकतवर 'बूस्टर्स' की तरह समझ सकते हैं, जिनमें ठोस ईंधन जैसे बारूद की तरह का ठोस केमिकल भरा होता है. रॉकेट को जमीन से उठाकर आसमान की तरफ धकेलने के लिए शुरुआत में बहुत भारी ताकत की जरूरत होती है। ये तीनों सॉलिड स्टेज एक-एक करके जलते हैं और रॉकेट को शुरुआती धक्का देकर अंतरिक्ष की सीमा लो अर्थ ऑर्बिट के पास पहुंचा देते हैं। 2. लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल यह रॉकेट के ऊपरी हिस्से में लगा एक बेहद बारीक और स्मार्ट तरल ईंधन वाला छोटा इंजन होता है। जब रॉकेट अंतरिक्ष में पहुंच जाता है, तो वहां ठोस ईंधन काम नहीं आता क्योंकि उसे अपनी मर्जी से ऑन या ऑफ नहीं किया जा सकता। यहां 'लिक्विड मॉड्यूल' काम आता है। यह अंतरिक्ष में सैटेलाइट को सही दिशा देने, रॉकेट की रफ्तार कम-ज्यादा करने और सैटेलाइट को उसकी तय की गई कक्षा में 'एडजस्ट' यानी स्थापित करने का काम करता है। अब 5 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल 1: 'स्काईरूट एयरोस्पेस' की शुरुआत कब और किस उद्देश्य से हुई थी? जवाब: स्काईरूट की शुरुआत करीब 8 साल पहले 2018 में हुई थी। इसे शुरू करने का मुख्य उद्देश्य भारत में ही बेहद किफायती और भरोसेमंद रॉकेट्स का निर्माण करना है, ताकि दुनियाभर के सैटेलाइट ऑपरेटर्स को ऑन-डिमांड और बजट-फ्रेंडली लॉन्चिंग सॉल्यूशंस दिए जा सकें। हाल ही में ये कंपनी देश की पहली स्पेस टेक यूनिकॉर्न बनी थी। यानी कंपनी की वैल्यूएशन 1 बिलियन डॉलर के पार पहुंच गई थी। सवाल 2: इस रॉकेट का नाम 'विक्रम-1' क्यों रखा गया है और इसका क्या महत्व है? जवाब: इस रॉकेट का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में 'विक्रम-1' रखा गया है। डॉ. साराभाई ने ही देश के स्पेस सेक्टर की मजबूत नींव रखी थी। स्काईरूट अपने सभी रॉकेट्स के नाम उनके सम्मान में इसी सीरीज पर रखती है। साल 2022 में लॉन्च किया गया पहला सबऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-एस' भी इसी सम्मान श्रृंखला का हिस्सा था। सवाल 3: इस लॉन्चिंग से भारत के स्पेस सेक्टर को क्या फायदे होंगे? जवाब: यह लॉन्चिंग भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए गेम चेंजर हो सकती है: सवाल 4: स्काईरूट के फाउंडर्स कौन हैं और उनका क्या कहना है? जवाब: स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका ने मिलकर की है। पवन ने कहा कि यह हमारी पहली टेस्ट फ्लाइट है और इससे हमें अंतरिक्ष की कक्षा में रॉकेट के व्यवहार का बेहद कीमती डेटा मिलेगा। नागा ने कहा कि हमारा और हमारी पूरी टीम का आठ वर्षों का कठोर प्रयास आज इस ऐतिहासिक मील के पत्थर के रूप में साकार हो रहा है। सवाल 5: साल 2022 में लॉन्च हुए 'विक्रम-एस' और इस नए 'विक्रम-1' रॉकेट में क्या अंतर है? जवाब: इन दोनों रॉकेट्स में तकनीक और क्षमता के स्तर पर बड़ा अंतर है: विक्रम S और विक्रम-1 में अंतर भारत में कितनी प्राइवेट स्पेस कंपनियां हैं? सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 400 से अधिक स्पेस स्टार्टअप रजिस्टर्ड हैं। इनमें सैटेलाइट, लॉन्च व्हीकल, प्रोपल्शन, स्पेस डेटा, ग्राउंड सिस्टम और डिफेंस-स्पेस टेक्नोलॉजी पर काम करने वाली कंपनियां शामिल हैं। 2014 में सिर्फ 1 प्राइवेट स्पेस स्टार्टअप था।

रिलायंस का मुनाफा 22% घटकर ₹20,946 करोड़:देश में जल्द चलेंगे प्लास्टिक-नोट, RBI ने जारी किया टेंडर; एअर इंडिया का नया एप लॉन्च

रिलायंस का मुनाफा 22% घटकर ₹20,946 करोड़:देश में जल्द चलेंगे प्लास्टिक-नोट, RBI ने जारी किया टेंडर; एअर इंडिया का नया एप लॉन्च

कल की बड़ी खबर रिलायंस से जुड़ी रही। रिलायंस इंडस्ट्रीज का वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 22.40% घटकर 20,946 करोड़ रुपए रहा। वहीं रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जल्द ही देश में प्लास्टिक यानी पॉलीमर से बने नोटों का पहला पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें... 1. रिलायंस का मुनाफा सालाना 22% घटकर ₹20,946 करोड़: पिछली तिमाही से 23% ज्यादा रहा; पहली तिमाही में रेवेन्यू 25% बढ़कर ₹3.11 लाख करोड़ पहुंचा रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 22.40% घटकर 20,946 करोड़ रुपए रहा। एक साल पहले की समान तिमाही में मुनाफा ₹26,994 करोड़ था। तिमाही आधार पर कंपनी का मुनाफा 23% बढ़ा है। पिछली तिमाही यानी वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंपनी को 16,971 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. देश में जल्द चलेंगे प्लास्टिक-नोट, RBI ने जारी किया टेंडर: ₹10 और ₹20 के नोटों से शुरू होगा ट्रायल, 2027 में फुल-स्केल लॉन्च की उम्मीद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जल्द ही देश में प्लास्टिक यानी पॉलीमर से बने नोटों का पहला पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह देश में नए जनरेशन की करेंसी लाने की RBI के प्लान का अगला कदम है। रिजर्व बैंक शुरुआती फेज में सबसे पहले छोटी वैल्यू के नोटों पर इसकी टेस्टिंग करेगा। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पहला पायलट प्रोजेक्ट ₹10 और ₹20 वैल्यू के छोटे नोटों के साथ शुरू होने की उम्मीद है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. अमेरिका को टक्कर देने आया चीन का AI मॉडल: किमी K3 में इंसानों जैसी आंखें और दिमाग; कोडिंग और रिसर्च मिनटों में करेगा चीनी कंपनी मूनशॉट AI ने अपना नया AI मॉडल किमी K3 पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह 2.8 ट्रिलियन पैरामीटर्स वाला दुनिया का पहला ओपन मॉडल है। इसमें 1 मिलियन टोकन की कॉन्टेक्स्ट विंडो दी गई है। पिछले मॉडल किमी K2 की तुलना में इसकी स्केलिंग दक्षता करीब 2.5 गुना बेहतर है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. एअर इंडिया का नया एप लॉन्च: फ्लाइट लेट या कैंसिल होने पर होम स्क्रीन पर फ्री होटल-कैब की डिटेल मिलेगी, पेमेंट भी आसान होगा एअर इंडिया ने सफर आसान बनाने के लिए अपने मोबाइल एप को नए फीचर्स के साथ अपडेट किया है। अब इस एप के जरिए न केवल टिकट बुकिंग पहले से कहीं ज्यादा तेजी से होगी, बल्कि फ्लाइट लेट या कैंसिल होने पर यात्रियों को एयरपोर्ट पर परेशान नहीं होना पड़ेगा। ऐसी किसी भी स्थिति में होटल में ठहरने और वहां तक जाने के लिए कैब की पूरी जानकारी सीधे एप की होम स्क्रीन पर ही मिलेगी। इसके साथ ही एप के पेमेंट सिस्टम को भी अपग्रेड किया गया है, जिससे टिकट बुक करना और पेमेंट करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. फरारी अमाल्फी स्पाइडर लॉन्च, कीमत ₹4.6 करोड़: 3.3 सेकेंड में 100kmph की स्पीड, 15.6-इंच डिस्प्ले और ADAS जैसे फीचर्स इटली की सुपरकार बनाने कंपनी फरारी ने आज भारत में नई कनवर्टिबल कार अमाल्फी स्पाइडर लॉन्च की है। ये 15.6 इंच डिजिटल डिस्प्ले और ADAS जैसे सेफ्टी फीचर्स के साथ आई है। कंपनी का दावा है कि यह 3.3 सेकेंड में 100kmph की स्पीड से दौड़ सकती है। कंपनी ने भारत में इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 4.6 करोड़ रुपए रखी है। यह अपने कूपे मॉडल की तुलना में करीब 52 लाख रुपए महंगी है, जिसकी मौजूदा कीमत 4.08 करोड़ रुपए है। नई अमाल्फी स्पाइडर की बुकिंग शुरू हो चुकी है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए...

अर्जेंटीना-स्पेन को फाइनल में पहुंचाने वाले 10 गेमचेंजर:मेसी ने सबसे ज्यादा 8 गोल दागे, स्पेनिश गोलकीपर सिमोन ने सिर्फ 1 गोल खाया

अर्जेंटीना-स्पेन को फाइनल में पहुंचाने वाले 10 गेमचेंजर:मेसी ने सबसे ज्यादा 8 गोल दागे, स्पेनिश गोलकीपर सिमोन ने सिर्फ 1 गोल खाया

102 मैच, 31 दिन और 46 टीमों के बाद फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 को दो फाइनलिस्ट मिल गए हैं। डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार खिताबी मुकाबले में पहुंचा है, जबकि स्पेन 16 साल बाद फाइनल खेलेगा। दोनों टीमें 19 जुलाई की रात 12:30 बजे ट्रॉफी के लिए आमने-सामने होंगी। फाइनल तक पहुंचने का रास्ता दोनों टीमों के लिए आसान नहीं रहा। कहीं आखिरी मिनट में मैच पलटा, कहीं एक्स्ट्रा टाइम में जीत मिली तो कहीं गोलकीपर ने शानदार बचाव कर टीम को बाहर होने से बचाया। अर्जेंटीना और स्पेन के इस सफर में 10 खिलाड़ी ऐसे रहे, जो जीत की सबसे बड़ी वजह बने। अर्जेंटीना के टॉप-5 प्लेयर्स 1. लियोनेल मेसी, कप्तान, फॉरवर्ड 39 साल के मेसी एक बार फिर अर्जेंटीना के सबसे बड़े मैच विनर साबित हुए। ग्रुप स्टेज में अल्जीरिया के खिलाफ हैट्रिक लगाई। सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ टीम 85 मिनट तक 0-1 से पिछड़ रही थी, लेकिन आखिरी सात मिनट में मेसी ने दो असिस्ट देकर मैच पलट दिया। उनके नाम पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 8 गोल हैं। 2. एंजो फर्नांडीज, मिडफील्डर सेमीफाइनल में एंजो ने इंग्लैंड के खिलाफ 25 गज दूर से शानदार शॉट लगाकर बराबरी दिलाई। डिफेंस और अटैक के बीच तालमेल बैठाने, गेंद पर नियंत्रण रखने और खेल की रफ्तार तय करने में उनकी भूमिका बेहद अहम रही। 3. लॉटारो मार्टिनेज, स्ट्राइकर इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल मैच 1-1 से बराबरी पर था। लॉटारो बतौर सब्स्टिट्यूट खेलने उतरे। इंजरी टाइम के दूसरे मिनट में उन्होंने हेडर से गोल कर अर्जेंटीना को लगातार दूसरे वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचा दिया। 4. क्रिस्टियन रोमेरो, सेंटर बैक राउंड ऑफ-16 में मिस्र के खिलाफ अर्जेंटीना 0-2 से पीछे थी। 79वें मिनट में रोमेरो ने गोल कर वापसी की शुरुआत की और अगले 13 मिनट में टीम ने तीन गोल दागकर मैच पलट दिया। डिफेंस में उनके टैकल और इंटरसेप्शन ने कई मजबूत टीमों के हमले रोके। 5. जूलियन अल्वारेज, स्ट्राइकर स्विट्जरलैंड के खिलाफ क्वार्टर फाइनल एक्स्ट्रा टाइम तक खिंच गया था। 112वें मिनट में अल्वारेज ने बॉक्स के बाहर से शानदार गोल कर अर्जेंटीना को सेमीफाइनल का टिकट दिलाया। स्पेन के 5 गेमचेंजर 1. उनाई सिमोन, गोलकीपर स्पेन के फाइनल तक पहुंचने की सबसे बड़ी वजह उसका मजबूत डिफेंस रहा और उस डिफेंस की सबसे मजबूत कड़ी गोलकीपर उनाई सिमोन रहे। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ एक गोल खाया। फ्रांस के खिलाफ सेमीफाइनल में एमबाप्पे के कई शॉट रोके। उन्होंने सभी मैच मिलाकर 609 मिनट तक गोल नहीं खाने का रिकॉर्ड भी बनाया। 2. लामिन यमाल, राइट विंगर यमाल ने अपनी स्पीड और ड्रिब्लिंग से हर मुकाबले में डिफेंडरों को परेशान किया। फ्रांस के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्होंने बॉक्स के अंदर फाउल हासिल किया, जिस पर मिले पेनल्टी को मिकेल ओयारजाबाल ने गोल में बदला। 3. मिकेल ओयारजाबाल, स्ट्राइकर स्पेन के सबसे भरोसेमंद फिनिशर ओयारजाबाल ने सेमीफाइनल में पेनल्टी पर गोल कर टीम को शुरुआती बढ़त दिलाई। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने पांच गोल और एक असिस्ट किया। 4. पॉ क्यूबार्सी, डिफेंडर 19 साल के क्यूबार्सी ग्रुप स्टेज के हर मिनट मैदान पर रहने वाले इकलौते टीनएजर रहे। उन्होंने 295 में से 290 पास पूरे किए। 16 बार गेंद रिकवर की और सिर्फ एक फाउल किया। एमबाप्पे और रोनाल्डो जैसे स्टार खिलाड़ियों के खिलाफ भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा। 5. पेड्रो पोरो, मिडफील्डर पोरो ने मिडफील्ड और अटैक के बीच सबसे मजबूत कड़ी का काम किया। छोटे-छोटे पास और बेहतरीन मूवमेंट से उन्होंने विपक्षी डिफेंस को लगातार तोड़ा। फ्रांस के खिलाफ सेमीफाइनल में दूसरा गोल कर स्पेन की फाइनल में जगह पक्की कर दी। ------------------------------------------------------- फुटबॉल वर्ल्ड कप से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… अर्जेंटीना फुटबॉल वर्ल्डकप फाइनल में, इंग्लैंड हारा; मेसी ने 2 गोल असिस्ट किए डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार फुटबॉल वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंच गया है। लियोनेल मेसी की टीम ने बुधवार रात को दूसरे सेमीफाइनल में इंग्लैंड को 2-1 से हराया। टीम 85 मिनट 0-1 से पिछड़ रही थी। उसके बाद आखिरी 7 मिनट में दो गोल दागे और जीत हासिल की। फाइनल में उसका मुकाबला 19 जुलाई को स्पेन से होगा। पढ़ें पूरी खबर

मेक्सिको में 7.4 तीव्रता का भूकंप, सुनामी का खतरा बढ़ा:10 लाख लोगों के लिए अलर्ट जारी, पड़ोसी देशों में भी महसूस हुए झटके

मेक्सिको में 7.4 तीव्रता का भूकंप, सुनामी का खतरा बढ़ा:10 लाख लोगों के लिए अलर्ट जारी, पड़ोसी देशों में भी महसूस हुए झटके

मेक्सिको के दक्षिणी राज्य चियापास के तट पर शुक्रवार को 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। इसके बाद करीब 10 लाख लोगों के लिए सुनामी का अलर्ट जारी किया गया है। अमेरिकी एजेंसी USGS के मुताबिक, भूकंप का केंद्र मेक्सिको के प्यूर्टो मडेरो शहर के पास था। यह 10 किलोमीटर की गहराई पर आया, जिससे आसपास के इलाकों में तेज झटकों की आशंका बढ़ गई है। US सुनामी वार्निंग सिस्टम ने इस क्षेत्र के लिए सुनामी का अलर्ट जारी किया है। 7.4 तीव्रता के भूकंप को 'मेजर' कैटेगरी में रखा जाता है, जो बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकते हैं। भूकंप के झटके मेक्सिको के पड़ोसी देश ग्वाटेमाला और अल साल्वाडोर में भी महसूस किए गए। फिलहाल किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की कोई रिपोर्ट नहीं है। सोशल मीडिया पर भूकंप से जुड़ा यह वीडियो वायरल है… 300 किमी के दायरे में सुनामी का खतरा अधिकारियों ने चेतावनी दी कि भूकंप के केंद्र से करीब 300 किलोमीटर के दायरे में खतरनाक सुनामी लहरें उठ सकती हैं। सुनामी अलर्ट मुख्य रूप से 3 इलाकों के लिए जारी किया गया है: चियापास का दक्षिणी प्रशांत तट ओआक्साका के तटीय इलाके ग्वाटेमाला से लगे प्रशांत तटीय क्षेत्र प्रशासन ने लोगों से समुद्र तट और निचले तटीय इलाकों से दूर रहने की अपील की है। मेक्सिको-ग्वाटेमाला सीमा पर स्थित सुचियाते में समुद्र के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। पिछले 30 दिनों में 22 भूकंप दर्ज भूकंप 'पैसिफिक रिंग ऑफ फायर' में आया, जो प्रशांत महासागर के चारों ओर फैला करीब 40 हजार किलोमीटर लंबा घोड़े की नाल के आकार का इलाका है। यह दुनिया का सबसे एक्टिव भूकंपीय क्षेत्र माना जाता है। यहां दुनिया के करीब 75% सक्रिय और निष्क्रिय ज्वालामुखी हैं और लगभग 90% भूकंप इसी क्षेत्र में आते हैं। पिछले 30 दिनों में इस इलाके में 22 भूकंप दर्ज किए गए हैं। इनमें शुक्रवार का 7.4 तीव्रता वाला भूकंप सबसे शक्तिशाली बताया जा रहा है। भूकंप के तुरंत बाद अधिकारियों ने कहा कि समुद्र में उठने वाली ऊंची और खतरनाक लहरें तटीय इलाकों में बाढ़ ला सकती हैं। लोगों से संभावित बाढ़, तेज समुद्री धाराओं और ऊंची लहरों को देखते हुए सतर्क रहने की अपील की गई है। हालांकि, अमेरिका के नेशनल सुनामी वार्निंग सेंटर ने साफ किया है कि अमेरिका के पश्चिमी तट, ब्रिटिश कोलंबिया और अलास्का के लिए सुनामी का कोई खतरा नहीं है। भूकंप क्यों आते हैं हमारी धरती की सतह मुख्य तौर पर 7 बड़ी और कई छोटी-छोटी टेक्टोनिक प्लेट्स से मिलकर बनी है। ये प्लेट्स लगातार तैरती रहती हैं और कई बार आपस में टकरा जाती हैं। टकराने से कई बार प्लेट्स के कोने मुड़ जाते हैं और ज्‍यादा दबाव पड़ने पर ये प्‍लेट्स टूटने लगती हैं। ऐसे में नीचे से निकली ऊर्जा बाहर की ओर निकलने का रास्‍ता खोजती है और इस डिस्‍टर्बेंस के बाद भूकंप आता है। ------------------------------- भूकंप से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… वेनेजुएला में फिर भूकंप के झटके, अब तक 1430 मौतें:करीब 3300 घायल, 51 हजार लापता; लोग खुद मलबा हटाकर अपनों को तलाश रहे दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में 25 जून को आए दो भूकंप के बाद स्थानीय समयानुसार शुक्रवार दोपहर को एक और भूकंप आया। देश के उत्तरी तट के पास आए इस भूकंप की तीव्रता 4.9 मापी गई है। रॉयटर्स के मुताबिक, राजधानी कराकास और माराके में भी झटके महसूस किए गए। पूरी खबर यहां पढ़ें…

रिलायंस का मुनाफा सालाना 22% घटकर ₹20,946 करोड़:पिछली तिमाही से 23% ज्यादा रहा; पहली तिमाही में रेवेन्यू 25% बढ़कर ₹3.11 लाख करोड़ पहुंचा

रिलायंस का मुनाफा सालाना 22% घटकर ₹20,946 करोड़:पिछली तिमाही से 23% ज्यादा रहा; पहली तिमाही में रेवेन्यू 25% बढ़कर ₹3.11 लाख करोड़ पहुंचा

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 22.40% घटकर 20,946 करोड़ रुपए रहा। एक साल पहले की समान तिमाही में मुनाफा ₹26,994 करोड़ था। हालांकि, तिमाही आधार पर कंपनी का मुनाफा 23% बढ़ा है। पिछली तिमाही यानी वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंपनी को 16,971 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। कंपनी का रेवेन्यू 25% बढ़कर 3.11 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया। एक साल पहले की समान तिमाही यानी अप्रैल-जून 2026 में यह 2.48 लाख करोड़ रुपए रहा था। वहीं तिमाही आधार पर कंपनी का रेवेन्यू 4% घटा है। पिछली तिमाही में रेवेन्यू 3.25 लाख करोड़ रुपए था। कंपनी के पांच मेन सेगमेंट हैं- रिलायंस जियो (जियो प्लेटफॉर्म), रिटेल, डिजिटल, ऑयल टू केमिकल्स (O2C) और ऑयल एंड गैस। यहां हम एक-एक कर सभी का पहली तिमाही का परफॉर्मेंस बता रहे हैं... रिलायंस जियो सालाना आधार पर (कंसॉलिडेटेड) जियो का मुनाफा बढ़ा है, लेकिन 5G एसेट्स के कैपिटलाइजेशन के कारण कंपनी का ब्याज खर्च और डेप्रिसिएशन चार्ज भी बढ़ा है, जिसने मुनाफे की रफ्तार को थोड़ा सीमित किया। ऑयल टू केमिकल से लेकर अदर बिजनेस सालाना आधार पर (कंसॉलिडेटेड) रिलायंस रिटेल का रजिस्टर्ड कस्टमर बेस 10.6% की ग्रोथ के साथ 39 करोड़ हो गया है। इस तिमाही में 577 नए स्टोर्स खुलने के साथ ही कुल स्टोर्स की संख्या अब 20,169 हो गई है। रिलायंस के नतीजों में आम आदमी के लिए क्या है? 1. जियो यूजर्स के लिए: 5G नेटवर्क और तेज होगा, नहीं रुकेंगे वीडियो अगर आप जियो यूजर हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। कंपनी ने 5G नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश जारी रखा है। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में आपको 5G की स्पीड और बेहतर मिलेगी, कॉल ड्रॉप की समस्या कम होगी और वीडियो स्ट्रीमिंग बिना किसी रुकावट के होगी। जियो के साथ करोड़ों नए ग्राहक जुड़ रहे हैं। जब नेटवर्क बड़ा होता है, तो कंपनी कनेक्टिविटी और ग्रामीण इलाकों में सर्विस सुधारने पर ज्यादा ध्यान देती है। 2. जियो एयरफाइबर और ब्रॉडबैंड: घर-घर पहुंचेगा हाई-स्पीड इंटरनेट कंपनी अपने जियो फाइबर (वायरलेस होम इंटरनेट) और फिक्स ब्रॉडबैंड का दायरा बहुत तेजी से बढ़ा रही है। अगर आप ऐसे इलाके में रहते हैं जहां केबल वाला इंटरनेट नहीं पहुंच पाता, तो अब आपको एयरफाइबर के जरिए आसानी से हाई-स्पीड इंटरनेट मिल सकेगा। यह बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई और वर्क फ्रॉम होम करने वालों के लिए मददगार साबित होगा। 3. रिलायंस रिटेल: नए स्टोर्स खुलेंगी, शॉपिंग होगी और आसान रिलायंस अपने रिटेल नेटवर्क और स्टोर के इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार बड़ा कर रहा है। इसका मतलब है कि आपके नजदीकी शहरों या इलाकों में रिलायंस के नए स्टोर्स (जैसे रिलायंस फ्रेश, स्मार्ट, डिजिटल या ट्रेंड्स) खुल सकते हैं, जिससे आपको खरीदारी के लिए ज्यादा ऑप्शन मिलेंगे। कंपनी अपने एफएमसीजी यानी रोजमर्रा के इस्तेमाल होने वाले घरेलू सामानों के खुद के ब्रांड्स का पोर्टफोलियो बढ़ा रही है। बाजार में रिलायंस के नए और किफायती प्रोडक्ट्स आने से आम आदमी को महंगाई के दौर में सस्ते ऑप्शन मिल सकते हैं। 4. न्यू एनर्जी: आने वाले समय में मिल सकती है सस्ती बिजली रिलायंस अपने 'न्यू एनर्जी' प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम कर रहा है और भारी निवेश कर रहा है। कंपनी बड़े पैमाने पर सोलर पैनल, ग्रीन हाइड्रोजन और गीगा-फैक्ट्रीज लगा रही है। भविष्य में जब यह प्रोजेक्ट पूरी तरह चालू होंगे, तो देश में क्लीन एनर्जी का प्रोडक्शन बढ़ेगा, जिससे पर्यावरण तो सुधरेगा ही, साथ ही आम आदमी को भी सस्ती बिजली और ईंधन का फायदा मिल सकता है। 5. पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस (O2C बिजनेस): देश में फ्यूल की सप्लाई रहेगी मजबूत रिलायंस के ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) यानी रिफाइनरी बिजनेस का प्रदर्शन मजबूत रहा है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम के उतार-चढ़ाव के बावजूद रिलायंस की रिफाइनरियां लगातार पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। इससे देश के भीतर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी (LPG) जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई में कोई कमी नहीं आएगी और कीमतें भी कंट्रोल में रहने की उम्मीद है। 6. रोजगार के अवसर: युवाओं के लिए नौकरियों के मौके रिलायंस अपने हर बड़े सेक्टर (रिफाइनरी, रिटेल, जियो और न्यू एनर्जी) में लगातार विस्तार और नए प्रोजेक्ट्स पर निवेश बढ़ा रहा है। जब भी कोई कंपनी इतने बड़े स्तर पर नेटवर्क और नए प्लांट लगाती है, तो लॉजिस्टिक्स, डिलीवरी, स्टोर्स, टेक्निकल सपोर्ट और कंस्ट्रक्शन जैसे फील्ड में लाखों नए डायरेक्ट और इनडायरेक्ट रोजगार पैदा होते हैं। 7. शेयर बाजार के निवेशकों के लिए: लॉन्ग टर्म में मजबूती के संकेत यदि आपने रिलायंस के शेयर खरीदे हैं या किसी ऐसे म्यूचुअल फंड में निवेश किया है जिसमें रिलायंस का शेयर शामिल है, तो कंपनी के कुल टर्नओवर और मुनाफे में निरंतरता आपके निवेश को सुरक्षा देती है। हालांकि छोटी अवधि में बाजार के उतार-चढ़ाव दिख सकते हैं, लेकिन कंपनी का मजबूत ढांचा लंबे समय में आपके पैसों को बढ़ाने में मदद करता है। इस साल अब तक 10% गिरा रिलायंस का शेयर शुक्रवार को FY27 की पहली तिमाही के नतीजों से पहले रिलायंस का शेयर 2.48% बढ़कर 1,328 रुपए पर बंद हुआ। बीते 5 दिन में कंपनी का शेयर 2% चढ़ा है। इस साल यानी 1 जनवरी से अब तक शेयर 15% गिरा है। वहीं एक साल में 10% गिरा है। रिलायंस का मार्केट कैप 17.95 लाख करोड़ रुपए है। भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट सेक्टर कंपनी है रिलायंस रिलायंस भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट सेक्टर कंपनी है। ये अभी हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन, पेट्रोलियम रिफाइनिंग और मार्केटिंग, पेट्रोकेमिकल्स, एडवांस मटेरियल और कंपोजिट, रिन्यूएबल एनर्जी, डिजिटल सर्विस और रिटेल सेक्टर में काम करती है। ये खबर भी पढ़ें… देश में जल्द चलेंगे प्लास्टिक-नोट, RBI ने जारी किया टेंडर: ₹10 और ₹20 के नोटों से शुरू होगा ट्रायल, 2027 में फुल-स्केल लॉन्च की उम्मीद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जल्द ही देश में प्लास्टिक यानी पॉलीमर से बने नोटों का पहला पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह देश में नए जनरेशन की करेंसी लाने की RBI के प्लान का अगला कदम है। पूरी खबर पढ़ें…

गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का 5वां राज्य बनाने की तैयारी:विधानसभा में प्रस्ताव पास, संसद से संविधान संशोधन की मांग

गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का 5वां राज्य बनाने की तैयारी:विधानसभा में प्रस्ताव पास, संसद से संविधान संशोधन की मांग

पाकिस्तान ने अपने अवैध कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान को देश का पांचवां राज्य (प्रांत) बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। गुरुवार को गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से संविधान में संशोधन करके इस क्षेत्र को राज्य का दर्जा देने की मांग की। प्रस्ताव में कहा गया है कि गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों को पाकिस्तान के दूसरे राज्यों के नागरिकों की तरह समान संवैधानिक, राजनीतिक और लोकतांत्रिक अधिकार दिए जाएं। इसके साथ ही इस क्षेत्र को नेशनल असेंबली, सीनेट और अन्य संघीय संवैधानिक संस्थाओं में प्रतिनिधित्व देने की भी मांग की गई है। प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री, स्पीकर, डिप्टी स्पीकर, नेता विपक्ष और दो निर्दलीय विधायकों के हस्ताक्षर हैं। अब इसे आगे की मंजूरी के लिए पाकिस्तान की संसद भेजा जाएगा। प्रस्ताव में क्या-क्या है? फिलहाल पाकिस्तान में चार ही राज्य हैं- पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा। गिलगित-बाल्टिस्तान अब तक सीमित स्वशासन के तहत संचालित होता रहा है और उसे पाकिस्तान के अन्य राज्यों जैसा संवैधानिक दर्जा प्राप्त नहीं है। प्रस्ताव में कहा गया है कि गिलगित-बाल्टिस्तान को अभी स्थायी नहीं, बल्कि अस्थायी (प्रोविजनल) तौर पर राज्य बनाया जाएगा। अगर भविष्य में जम्मू-कश्मीर विवाद का कोई समाधान निकलता है, तो उसके अनुसार इस क्षेत्र की स्थिति दोबारा तय की जा सकेगी। इसके साथ ही प्रस्ताव में यह भी मांग की गई है कि जब तक गिलगित-बाल्टिस्तान को राज्य का दर्जा नहीं मिलता, तब तक पाकिस्तान की केंद्र सरकार और चारों राज्य यह सुनिश्चित करें कि इस क्षेत्र को भी सरकारी फंड और राष्ट्रीय संसाधनों में उचित हिस्सा मिले। यानी गिलगित-बाल्टिस्तान को भी दूसरे राज्यों की तरह विकास के लिए धन दिया जाए। गिलगित-बाल्टिस्तान का राज्य बनना कितना मुश्किल? पाकिस्तान लंबे समय से कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर विवाद का अंतिम समाधान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों के अनुसार जनमत संग्रह (प्लेबिसाइट) के जरिए होना चाहिए। पाकिस्तान के मुताबिक, गिलगित-बाल्टिस्तान भी इसी विवादित क्षेत्र का हिस्सा है। इसी वजह से विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा से प्रस्ताव पास होने के बावजूद गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का स्थायी पांचवां राज्य बनाना आसान नहीं होगा। ऐसा करने पर पाकिस्तान के उस पुराने रुख पर सवाल उठ सकते हैं, जिसमें वह कश्मीर को विवादित क्षेत्र बताता रहा है। यही कारण है कि प्रस्ताव में केवल अस्थायी (प्रोविजनल) राज्य बनाने की बात कही गई है। गिलगित-बाल्टिस्तान को 2009 में पहली बार मिली विधानसभा 1947 से लेकर कई दशकों तक गिलगित-बाल्टिस्तान का प्रशासन सीधे पाकिस्तान की केंद्र सरकार के हाथ में रहा। यहां न तो प्रांत का दर्जा था और न ही लोगों को अपने प्रतिनिधियों के जरिए शासन चलाने का अधिकार मिला था। 2009 में पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान एम्पावरमेंट एंड सेल्फ-गवर्नेंस ऑर्डर लागू किया। इसके तहत पहली बार यहां विधानसभा चुनाव कराए गए और स्थानीय सरकार बनाई गई। हालांकि विधानसभा के अधिकार सीमित थे और बड़े फैसले केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के हाथ में ही रहे। इसके बाद 2018 में गिलगित-बाल्टिस्तान ऑर्डर-2018 लागू किया गया, जिसके तहत स्थानीय विधानसभा और मुख्यमंत्री को पहले से ज्यादा अधिकार दिए गए। इसके बावजूद गिलगित-बाल्टिस्तान आज तक पाकिस्तान का संवैधानिक राज्य नहीं बन सका। गिलगित-बाल्टिस्तान और भारत का क्या संबंध है? गिलगित-बाल्टिस्तान ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र में कश्मीर घाटी के उत्तर-पश्चिम में स्थित है। यह कभी जम्मू-कश्मीर रियासत का हिस्सा था। उस समय रियासत पांच हिस्सों में बंटी थी- जम्मू, कश्मीर, लद्दाख, गिलगित वजाहत और गिलगित एजेंसी। आज पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर क्षेत्र का करीब 85% हिस्सा गिलगित-बाल्टिस्तान (नॉर्दर्न एरियाज) में है, जबकि लगभग 15% हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) कहलाता है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) भी इसी इलाके से होकर गुजरता है। पाकिस्तान की जीवनरेखा मानी जाने वाली सिंधु नदी भी सबसे पहले इसी क्षेत्र में प्रवेश करती है। गिलगित-बाल्टिस्तान भारत से अलग कैसे हुआ? पाकिस्तान ने इसे संविधान में क्यों शामिल नहीं किया? 2009 के बाद प्रशासनिक व्यवस्था कैसे बदली? साल 2000 के बाद, खासकर अमेरिका में 9/11 हमलों और चीन के वन बेल्ट वन रोड (अब बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव) परियोजना में इस इलाके की बढ़ती रणनीतिक अहमियत को देखते हुए पाकिस्तान ने यहां प्रशासनिक बदलाव शुरू किए। 2009 के ऑर्डर के तहत नॉर्दर्न एरियाज लेजिस्लेटिव काउंसिल (NALC) की जगह गिलगित-बाल्टिस्तान लेजिस्लेटिव असेंबली बनाई गई और नॉर्दर्न एरियाज का नाम बदलकर गिलगित-बाल्टिस्तान कर दिया गया। हालांकि विधानसभा बनने के बाद भी अंतिम अधिकार इस्लामाबाद के पास ही रहे। नई विधानसभा में 24 सदस्य सीधे चुने जाते हैं और 9 सदस्य नामित किए जाते हैं। 2010 के बाद से हर चुनाव में इस्लामाबाद में सत्ता में रहने वाली पार्टी ही यहां सरकार बनाती रही है। नवंबर 2020 के चुनाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने 33 में से 24 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी।

इंडियन बुलेट-ट्रेन प्रोजेक्ट लेट होने से पूर्व जापानी मंत्री नाराज:कहा- हमने मेहनत की, लेकिन भारतीय मंत्री का रवैया खराब, वादों-शर्तों से पलटे

इंडियन बुलेट-ट्रेन प्रोजेक्ट लेट होने से पूर्व जापानी मंत्री नाराज:कहा- हमने मेहनत की, लेकिन भारतीय मंत्री का रवैया खराब, वादों-शर्तों से पलटे

भारत के बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में देरी होने पर जापान के पूर्व न्याय मंत्री हिदेकी माकिहारा ने भारत पर ही गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया X पर लिखा कि देरी की सबसे बड़ी वजह भारतीय मंत्री का रवैया रहा। माकिहारा ने कहा- मैं खुद प्रोजेक्ट से जुड़ा रहा। जापानी टीम ने पूरी मेहनत की, लेकिन उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिले। भारतीय पक्ष ने वादे पूरे नहीं किए, समझौतों से पीछे हट गए। अपने हिसाब से शर्तें बदलते रहे। इसी वजह से प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ा। माकीहारा ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को लेकर यह बात कही। पीएम नरेंद्र मोदी और जापानी के पूर्व PM शिंजो आबे ने 14 सितंबर 2017 में इस प्रोजेक्ट का इनॉगरेशन किया था। भारतीय विदेश मंत्रालय ने माकीहारा के बयान पर कहा- भारत और जापान के बीच बातचीत अच्छी तरह आगे बढ़ रही है। जापान की पीएम के दौरे का भी असर नहीं- माकिहारा माकिहारा के मुताबिक, जापान की प्रधानमंत्री के दौरे से भी कोई नतीजा नहीं निकला। प्रधानमंत्री साने ताकाइची 1-3 जुलाई 2026 में भारत दौरे पर आई थी। इस दौरान दोनों देशों ने 129 समझौतों का ऐलान किया था। इन समझौतों का मकसद निवेश, उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग, तकनीक, कौशल विकास और सप्लाई चेन सहयोग को मजबूत करना है। माकिहारा ने पोस्ट में टॉयो केइजाई ऑनलाइन की रिपोर्ट भी शेयर की। इसमें दावा किया गया कि बुलेट ट्रेन के सबसे अहम सेफ्टी सिस्टम (सिग्नलिंग सिस्टम) में जापान को शामिल नहीं किया गया। माकीहारा ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के आगे न बढ़ पाने की पूरी जिम्मेदारी 100% भारतीय पक्ष की है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा- मुंबई और अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना पर भारत और जापान के बीच बातचीत अच्छी तरह आगे बढ़ रही है। जापान की E-10 ट्रेन सीरीज अभी डेवलप की जा रही है और इसकी आपूर्ति 2030 के शुरुआती वर्षों में होगी। दोनों देशों ने फैसला किया है कि 2027 में शुरू होने वाले पहले सेक्शन पर भारतीय हाई स्पीड ट्रेन शुरू की जाएगी। भारत ने आरोप खारिज किए भारत सरकार ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर जापान के साथ मतभेद की खबरों को खारिज किया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि पूर्व जापानी मंत्री की टिप्पणी उनकी निजी राय है और उसका वास्तविक स्थिति से कोई मेल नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "हमने संबंधित पोस्ट देखी है। यह एक व्यक्ति की निजी राय है, जो तथ्यों से काफी अलग है।" मंत्रालय ने कहा कि मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना पर भारत और जापान के बीच बातचीत अच्छी तरह आगे बढ़ रही है और दोनों देश इस परियोजना पर मिलकर काम कर रहे हैं। 2017 में शुरू हुआ बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट देश की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलेगी। दोनों शहरों के बीच 508 किमी का सफर बुलेट ट्रेन तीन घंटे में तय करेगी। अभी सफर में सात-आठ घंटे लगते हैं। प्रोजेक्ट में ₹88 हजार करोड़ जापानी निवेश मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹2 लाख करोड़ है। लगभग ₹88 हजार करोड़ जापान की सरकारी एजेंसी JICA देगी। भारत को इस पर सिर्फ 0.1% सालाना ब्याज लगेगा। इस कर्ज को चुकाने के लिए भारत को 50 साल मिलेंगे और पहले 15 साल तक किस्त नहीं देनी होगी। जापान अब तक 1,150 अरब येन (करीब ₹55 हजार करोड़) मंजूर कर चुका है। वह शिंकानसेन तकनीक, ट्रेनिंग और तकनीकी विशेषज्ञता भी भारत को दे रहा है। रूट का 7 किमी हिस्सा समुद्र के अंदर होगा --------------------- ये खबर भी पढ़ें… मोदी बोले- सुजुकी दो-तिहाई कारें भारत में बना रही:जापान की मदद से देश में खाद के 1000 कारखाने लगेंगे; PM ताकाइची को बहन कहा भारत और जापान ने आर्थिक साझेदारी को नई रफ्तार देने का फैसला किया है। भारत-जापान जॉइंट इकोनोमिक फोरम में प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी कंपनियों की दिक्कतें दूर करने के लिए 'जापान बिजनेस वीक' शुरू करने का ऐलान किया। इसके तहत PMO के सीनियर अधिकारी सीधे जापानी निवेशकों से बातचीत करेंगे। पूरी खबर पढ़ें…

विश्व कप मैच के बाद फॉकलैंड पर फिर भिड़े अर्जेंटीना-ब्रिटेन:ब्रिटिश वॉरशिप के समुद्री इलाके में घुसने का आरोप; खिलाड़ियों के बैनर से विवाद बढ़ा

विश्व कप मैच के बाद फॉकलैंड पर फिर भिड़े अर्जेंटीना-ब्रिटेन:ब्रिटिश वॉरशिप के समुद्री इलाके में घुसने का आरोप; खिलाड़ियों के बैनर से विवाद बढ़ा

फीफा विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में इंग्लैंड को 2-1 से हराने के कुछ घंटों बाद अर्जेंटीना और ब्रिटेन के बीच फॉकलैंड द्वीप को लेकर नया विवाद शुरू हो गया। अर्जेंटीना ने आरोप लगाया कि ब्रिटेन की रॉयल नेवी का वॉरशिप HMS मेडवे बिना अनुमति उसके समुद्री क्षेत्र में घुस आया। अर्जेंटीना ने इसे सैन्य घुसपैठ करार दिया। विदेश मंत्री पाब्लो क्विर्नो ने कहा कि इस मामले में ब्रिटिश दूतावास के सामने औपचारिक विरोध दर्ज कराया गया है। वहीं ब्रिटेन ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि यात्रा की जानकारी पहले ही अर्जेंटीना सरकार को दे दी गई थी और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप थी। यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब इंग्लैंड को हराकर फाइनल में पहुंचने के बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने मैदान पर ‘लास माल्विनास सन अर्जेंटीना’ (माल्विनास अर्जेंटीना का है) लिखा बैनर लहराया। अर्जेंटीना में फॉकलैंड को माल्विनास कहा जाता है। इस घटना के बाद दोनों देशों का पुराना विवाद फिर चर्चा में आ गया। अर्जेंटीना की उपराष्ट्रपति ने इंग्लैंड को समुद्री लुटेरा कहा मैच से पहले अर्जेंटीना की उपराष्ट्रपति विक्टोरिया वियारुएल ने इंग्लैंड को आक्रमणकारी और कब्जा करने वाले समुद्री लुटेरे तक कहा था। मैच जीतने के बाद उन्होंने खिलाड़ियों की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “फॉकलैंड अर्जेंटीना का है। हमें स्टेडियम में यह बैनर ले जाने से रोका गया, लेकिन वे भूल गए कि माल्विनास हमारे खून और हमारे दिल में बसता है।” ब्रिटेन ने नाराजगी जताई, कहा- खेल में राजनीति न हो वहीं, ब्रिटेन के बिजनेस सेक्रेटरी पीटर काइल ने खिलाड़ियों के बैनर को पूरी तरह अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि फुटबॉल में राजनीति की कोई जगह नहीं होनी चाहिए और फीफा को जांच करनी चाहिए कि कहीं खिलाड़ियों ने राजनीतिक संदेश देने संबंधी नियमों का उल्लंघन तो नहीं किया। उन्होंने कहा, “राजनीति को फुटबॉल से दूर रहना चाहिए। आगे क्या कार्रवाई होगी, इसका फैसला अब फीफा करेगा।” फॉकलैंड को लेकर अर्जेंटीना और ब्रिटेन में 44 साल से विवाद फॉकलैंड द्वीप का मामला ब्रिटेन और अर्जेंटीना दोनों के लिए बहुत बड़ा मुद्दा है। दोनों देश इस पर दावा करते हैं। अर्जेंटीना इस द्वीप को माल्विनास कहता है। फॉकलैंड दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित हैं और अर्जेंटीना से सिर्फ 500 किमी दूर है। वहीं ब्रिटेन से यह 13,000 किमी दूर स्थित है। अर्जेंटीना ऐतिहासिक रूप से इस द्वीप को अपना बताता आया है। अर्जेंटीना का कहना है कि ये द्वीप उसके पास होने चाहिए, क्योंकि ये उसके इलाके के करीब हैं। वहीं ब्रिटेन कहता है कि वहां रहने वाले लोग खुद को ब्रिटिश मानते हैं और उन्होंने वोट करके भी ब्रिटेन के साथ रहने की इच्छा जताई है, इसलिए यह उसका क्षेत्र है। 1982 में अर्जेंटीना ने इन द्वीपों पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद ब्रिटेन की तत्कालीन प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने सेना भेजकर सिर्फ 10 हफ्ते में इन्हें वापस हासिल किया था। अर्जेंटीना के आत्मसमर्पण करने से पहले लगभग 650 अर्जेंटीनाई सैनिक और 255 ब्रिटिश सैनिक मारे गए थे। फॉकलैंड पर ब्रिटेन का रुख क्या है ब्रिटेन ने दोहराया कि फॉकलैंड द्वीप के लोगों ने कई बार जनमत के जरिए ब्रिटिश क्षेत्र बने रहने की इच्छा जताई है। डाउनिंग स्ट्रीट ने कहा- ब्रिटेन का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। फॉकलैंड द्वीप के लोग ब्रिटिश हैं और अपने भविष्य का फैसला करने का अधिकार उन्हीं के पास है।

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