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State-wise news and regional updates.

धार में 1.90 करोड़ खर्च कर लगाए गए पौधे सूखे:मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के तहत काटे गए थे हजारों पेड़, भरपाई के लिए किया गया था प्लांटेशन

धार जिले के सरदारपुर वन परिक्षेत्र की कौद बीट के ग्राम शेरगढ़ में मेट्रो रेल परियोजना के तहत काटे गए पेड़ों की भरपाई के लिए किया गया वृक्षारोपण सवालों के घेरे में है। वन विभाग ने करीब तीन महीने पहले 30.178 हेक्टेयर क्षेत्र में 30,178 पौधे लगाए थे, लेकिन अब इनमें से हजारों पौधे सूख चुके हैं। कई जगह पौधों का नामोनिशान तक नहीं है। जहां पौधे लगाए गए थे, वहां अब सिर्फ सूखे डंठल दिखाई दे रहे हैं। इस वृक्षारोपण पर करीब 1 करोड़ 91 लाख 77 हजार रुपए खर्च किए गए थे। इसका उद्देश्य मेट्रो रेल परियोजना में कटे पेड़ों की भरपाई करना और क्षेत्र में हरियाली बढ़ाना था। लेकिन मौजूदा स्थिति योजना की सफलता पर सवाल खड़े कर रही है। देखें तस्वीरें… कई जगह सिर्फ सूखे डंठल बचे मौके पर बड़ी संख्या में पौधे सूखे मिले। कई स्थानों पर पौधों का अस्तित्व तक नहीं दिख रहा है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि पौधारोपण के बाद उनकी देखभाल और निगरानी कितनी गंभीरता से की गई। सिर्फ पौधे लगाना काफी नहीं विशेषज्ञों के अनुसार, वृक्षारोपण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होता। उनकी नियमित सिंचाई, सुरक्षा और देखभाल भी उतनी ही जरूरी होती है। यदि पौधारोपण के बाद रखरखाव नहीं किया जाए, तो करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद योजना का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता। शेरगढ़ का यह मामला भी इसी ओर इशारा करता है। सरकारी खर्च और निगरानी पर सवाल सरकार हर साल पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाती है। ऐसे में यदि कटे पेड़ों की भरपाई के लिए लगाए गए हजारों पौधे शुरुआती तीन महीनों में ही सूख जाएं, तो योजनाओं की निगरानी और जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है। वृक्षारोपण अभियान की सफलता केवल पौधे लगाने से नहीं, बल्कि उनके जीवित रहने से तय होती है। यदि शुरुआती महीनों में ही बड़ी संख्या में पौधे नष्ट हो जाएं, तो करोड़ों रुपए खर्च करने का उद्देश्य अधूरा रह जाता है। रेंजर से नहीं मिला कोई जवाब इस मामले में सरदारपुर वन परिक्षेत्र के रेंजर शैलेंद्र सोलंकी से पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिल सका।

Admin · 7/19/2026

दो एसपी सहित तीन IPS के तबादले:सुधीर अग्रवाल टीकमगढ़, मोती उर रहमान श्योपुर पुलिस अधीक्षक बने

मध्य प्रदेश सरकार ने रविवार को भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के तीन अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी किए। आदेश के तहत टीकमगढ़ एसपी मनोहर सिंह मंडलोई को पुलिस मुख्यालय भोपाल में सहायक पुलिस महानिरीक्षक (AIG) बनाया गया है। उनकी जगह श्योपुर के एसपी सुधीर कुमार अग्रवाल को टीकमगढ़ का नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है, जबकि रीवा की 9वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल (SAF) में सेनानी पद पर पदस्थ मोती उर रहमान को श्योपुर का एसपी बनाया गया है। गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, वर्ष 2012 बैच के आईपीएस मनोहर सिंह मंडलोई को टीकमगढ़ एसपी के पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय भोपाल में सहायक पुलिस महानिरीक्षक बनाया गया है। मंडलोई अक्टूबर 2024 से टीकमगढ़ के एसपी के रूप में पदस्थ थे। वर्ष 2016 बैच के आईपीएस सुधीर कुमार अग्रवाल, जो अक्टूबर 2025 से श्योपुर के पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यरत थे, अब टीकमगढ़ के नए एसपी होंगे। वहीं वर्ष 2018 बैच के आईपीएस मोती उर रहमान को रीवा स्थित 9वीं वाहिनी विशेष सशस्त्र बल (SAF) के सेनानी पद से श्योपुर का पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है। वे मई 2026 से 9वीं वाहिनी, रीवा में पदस्थ थे।

Admin · 7/19/2026

₹21 करोड़ की ठगी का 'फोर-लेयर' चक्रव्यूह:देश के 10 राज्यों में साइबर सेल का डेरा; सीनियर चार्टर्ड अकाउंटेंट से हुई है ठगी

ग्वालियर में सीनियर चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय से यूएसडीटी (USDT) में निवेश के नाम पर 21.06 करोड़ रुपए की ठगी के मामले में साइबर पुलिस की नजर अब उन दो हजार बैंक खातों पर है, जिनमें ट्रांजेक्शन हुए हैं। ये सभी म्यूल अकाउंट हैं, जिन्हें किराए पर लिया गया था। हर ट्रांजेक्शन पर ठगी गई रकम का 8 प्रतिशत कमीशन एजेंट को देने के बाद राशि दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी। यह म्यूल अकाउंट्स की ऐसी चेन है, जिसके एक सिरे तक तो पुलिस पहुंच जाती है, लेकिन दूसरे छोर तक नहीं पहुंच पा रही है। राज्य साइबर सेल, ग्वालियर जोन की टीम देश के 10 से अधिक राज्यों में डेरा डाले हुए है। साइबर पुलिस इस मामले में जल्द बड़ा खुलासा कर सकती है। जिन खातों में लाखों रुपए ट्रांसफर हुए हैं, फिलहाल टीम की नजर उन्हीं पर है। शहर के प्रतिष्ठित 70 वर्षीय सीनियर चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) अशोक विजयवर्गीय से हुई 21 करोड़ 6 लाख रुपए की ठगी ने देश के साइबर इन्वेस्टिगेशन सिस्टम को झकझोर दिया है। राज्य साइबर सेल, ग्वालियर जोन की शुरुआती तकनीकी जांच में सामने आया है कि ठगों ने इस वारदात में दो हजार से अधिक म्यूल खातों में रकम का ट्रांजेक्शन किया। यही खाते अब साइबर सेल के रडार पर हैं। हालांकि, ट्रांजेक्शन देश के लगभग हर राज्य में हुए हैं। ऐसे में आरोपियों तक पहुंचना किसी समुद्र में सुई खोजने जैसा है। फिलहाल दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, हरियाणा, मध्यप्रदेश, बिहार और उत्तर प्रदेश समेत 10 राज्यों में साइबर पुलिस की टीमें आरोपियों की घेराबंदी में जुटी हैं। देश के हर कोने में हुआ ट्रांजेक्शन साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ठगों ने 21 करोड़ रुपए की रकम को खपाने के लिए देशभर के बैंकों का इस्तेमाल किया। चेन्नई से लेकर कश्मीर तक और गुजरात से लेकर कोलकाता तक हजारों बैंक खातों में हजारों ट्रांजेक्शन किए गए। फिलहाल साइबर टीम की नजर उन बड़े बैंक खातों पर है, जिनमें सबसे अधिक रकम ट्रांसफर की गई। ठगों का 'फोर-लेयर' चक्रव्यूह: ऐसे खपाई गई ठगी की रकम सायबर एक्सपर्ट्स और जांच अधिकारियों के अनुसार, ठगों ने इस पूरी राशि को पुलिस की पकड़ से दूर रखने के लिए एक जटिल 'फोर-लेयर' (चार स्तरीय) बैंकिंग नेटवर्क का इस्तेमाल किया। इंटरनेशनल रैकेट के सुराग, विदेशी नंबरों की जांच शिकायत के मुताबिक, रोशनी घर रोड निवासी पीड़ित सीनियर सीए अशोक विजयवर्गीय से ठगी के लिए भारतीय नंबरों (+91-8151931249 व +91-7092164831) के अलावा एक विदेशी नंबर +1 (516) 713-7291 का भी उपयोग किया गया है, जो किसी अमेरिकी या कनाडाई वर्चुअल नंबर प्लेटफॉर्म से संचालित हो रहा था। ठगों ने फेडरल बैंक, आईसीआईसीआई, केनरा बैंक और यस बैंक जैसी प्रमुख संस्थाओं के कॉपोरेट व करंट खातों का इस्तेमाल लेयरिंग के लिए किया है। ऐसे समझिए पूरा मामला राज्य साइबर सेल को दी गई आधिकारिक शिकायत के अनुसार, रोशनी घर रोड निवासी सीनियर सीए व चेंबर चुनाव के मुख्य निर्वाचन अधिकारी 70 वर्षीय अशोक विजयवर्गीय के साथ ठगी की शुरुआत दिसंबर 2025 में हुई थी। अशोक के मोबाइल पर एक अनजान भारतीय नंबर (+91-8151931249) से मैसेज आया। मैसेज करने वाली महिला ने खुद का नाम 'दिव्या सिंह' बताया और खुद को एक बड़ी निवेश सलाहकार के रूप में परिचय दिया। दिव्या ने दावा किया कि यदि वे यूएसडीटी (USDT) क्रिप्टो ट्रेडिंग में पैसा लगाते हैं, तो उन्हें उम्मीद से कई गुना ज्यादा मुनाफा होगा। इसके बाद बातचीत दूसरे नंबरों और फिर एक विदेशी नंबर (+1 (516) 713-7291) के जरिए होने लगी। ठगों ने अशोक को झांसा देकर एक फर्जी ट्रेडिंग पोर्टल के लिंक पर उनका रजिस्ट्रेशन करवा दिया। पहले कुछ लाख रुपए लगाए और मुनाफा हुआ। कैश निकाला भी गया। इसके बाद वह और उनके क्लाइंट पैसा लगाते चले गए। जुलाई 2026 में जब पोर्टल पर पीड़ित का कुल मुनाफा 33.25 करोड़ रुपए दिखाई देने लगा। जब निकालना चाहा तो ठगों ने 10 करोड़ रुपए की मांग की। इसके बाद सीए को ठगी का अहसास हो गया था। मामले की शिकायत साइबर सेल पहुंची और मामला दर्ज किया गया। इंस्पेक्टर मुकेश नारौलिया राज्य साइबर सेल ने बताया- "क्रिप्टो करेंसी (USDT) ट्रेडिंग के नाम पर वरिष्ठ सीए अशोक विजयवर्गीय से 21 करोड़ 6 लाख रुपए की देश की बड़ी ठगियों में से एक वारदात हुई है। इस राशि को देश भर के हजारों खातों में 4 लेयर के तहत ट्रांसफर किया गया है। हमारी तकनीकी टीम इन अकाउंट की डिटेल जुटाकर रैकेट के सदस्यों के पीछे लगी हुई है।

Admin · 7/19/2026

पहले गाय और फिर ट्रक से टकराई कार, वीडियो:मुरैना में ड्राइवर ने मचाया उत्पात, पूरी रोड पर लहराता रहा कार

मुरैना नेशनल हाईवे-44 पर शनिवार को कार चालक ने जमकर उत्पात मचाया। उसकी कार हाईवे पर सांप की तरह लहराते हुए चल रही थी। पीछे चल रहे एक अन्य कार चालक ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया, जो अब सामने आया है। देखें तस्वीरें… शनिवार शाम करीब 5 बजे नेशनल हाईवे-44 पर मारुति XL6 कार (क्रमांक MP 06 AK 9036) का चालक पूरी सड़क पर कार लहरा रहा था। कार एक बार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बैठे गौवंश से टकरा गई। इसके बाद भी चालक ने वाहन नहीं रोका। कुछ दूर आगे जाकर कार हाईवे पर चल रहे एक ट्रक से टकरा गई। टक्कर के बाद कार सड़क किनारे बनी दीवार से जा भिड़ी। हैरानी की बात यह रही कि हादसे के बाद भी चालक मौके पर नहीं रुका। वह क्षतिग्रस्त कार लेकर वहां से फरार हो गया। राहगीर बोले- नशे में धुत था युवक पूरी घटना का वीडियो पीछे चल रही एक कार में सवार युवक ने बना लिया। उसका कहना है कि युवक नशे में धुत था। वीडियो सामने आने के बाद सिविल लाइन थाना पुलिस कार और उसके चालक की तलाश में जुट गई है। पुलिस वीडियो के आधार पर मामले की जांच कर रही है। गनीमत रही कि इस पूरे घटनाक्रम में कोई जनहानि नहीं हुई। हालांकि, जिस तरह चालक शराब के नशे में हाईवे पर वाहन चला रहा था, उससे बड़ा सड़क हादसा हो सकता था। पुलिस अब वाहन चालक की पहचान कर उसके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रही है। फिलहाल चालक की पहचान नहीं सिविल लाइन थाना प्रभारी टीआई उदयभान यादव ने बताया कि फिलहाल कार चालक की पहचान नहीं हो सकी है। उसकी पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। पहचान होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

Admin · 7/19/2026

शादीशुदा होकर लिव-इन में गए तो 5 साल की जेल:सीएम ने क्यों कहा- राम एक शादी करेगा तो रहीम चार क्यों'; MP में UCC से क्या बदलेगा?

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को कटनी में कहा- अगर राम एक शादी करेगा तो रहीम दो या चार शादियां क्यों करेगा? मध्य प्रदेश में वही रह पाएगा, जो एक ही शादी करेगा। रविवार को भोपाल के जगदीशपुर में हुई कैबिनेट बैठक में मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता-2026 को मंजूरी मिल गई। अब इसे 20 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र में विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा। तो क्या UCC किसी एक धर्म के खिलाफ है और क्या लिव-इन पार्टनर्स को भी अलग करना चाहती है सरकार; समझेंगे आज के एमपी एक्सप्लेनर में… सवाल 1: UCC का एमपी मॉडल क्या उत्तराखंड से ज्यादा सख्त है? जवाब: मध्य प्रदेश का ड्राफ्ट काफी हद तक उत्तराखंड मॉडल पर ही आधारित है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि उत्तराखंड का UCC ड्राफ्ट भी सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई ने ही तैयार किया था और मध्य प्रदेश की समिति की अध्यक्ष भी वही हैं। हालांकि, मध्य प्रदेश के ड्राफ्ट में कुछ बदलाव किए गए हैं… सवाल 2: ‘राम एक शादी करेगा तो रहीम चार क्यों’ सीएम के बयान के क्या मायने हैं? जवाबः मुख्यमंत्री के इस बयान का मतलब बहुविवाह खत्म करना है। सवाल 3: क्या लिव-इन में रहने पर पुलिस सीधे गिरफ्तार कर लेगी? जवाबः अगर आप सामान्य और अविवाहित लिव-इन कपल हैं तो जवाब है- नहीं। पुलिस यूं ही गिरफ्तार नहीं करेगी। प्रस्ताव के मुताबिक, हर लिव-इन कपल को रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। इसके 5 अहम पहलू हैं 1. पेरेंट्स और पुलिस को सूचना: रजिस्ट्रेशन होते ही इलाके के थाने और कपल के माता-पिता को इसकी आधिकारिक सूचना भेजी जाएगी। 2. पड़ोसी भी कर सकेंगे शिकायत: बिना रजिस्ट्रेशन लिव-इन में रहने पर पड़ोसी, स्थानीय लोग या किराए के मकान के मालिक भी पुलिस से इसकी शिकायत कर सकते हैं। 3. बिना बताए रहने पर 3 महीने की जेल: रजिस्ट्रेशन न कराने या अपनी गलत पहचान बताने पर 3 महीने तक की जेल हो सकती है। उत्तराखंड में भी बिल्कुल यही नियम है। ब्रेकअप होने की स्थिति में रजिस्ट्रेशन कैंसिल कराना भी उतना ही जरूरी होगा। 4. शादीशुदा होने पर 5 साल की जेल: अगर कोई व्यक्ति पहले से शादीशुदा है और वह लिव-इन रिलेशनशिप में जाता है, तो 5 साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है। सरकार ने इसे कठोरता से लागू करने की बात कही है। 5. मेंटेनेंस देना होगा: पुरुष अगर अपनी लिव-इन पार्टनर को छोड़कर जाता है, तो उसे महिला को भरण-पोषण देना पड़ सकता है। सवाल 4: लिव-इन कपल अगर अलग हो जाएं, तो उनसे पैदा हुए बच्चों का क्या होगा? जवाबः अभी तक लिव-इन से जन्मी संतानों को अपने जन्म देने वाले माता-पिता की संपत्ति में हक पाने के लिए अक्सर कोर्ट में लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती थी, खासकर तब जब कपल में अनबन हो जाए। सूत्रों के मुताबिक, इसे सिर्फ संपत्ति के अधिकार तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि बच्चे की पूरी कानूनी पहचान को सुरक्षित करने का प्रस्ताव है। इसमें 3 प्रावधान हो सकते हैं.... 1. माता-पिता की पहचान कानूनी तौर पर मिलेगी: अभी तक कानूनी उलझनों में बच्चों को अक्सर समाज में अवैध या नाजायज मान लिया जाता था। लेकिन UCC लागू होने के बाद, रजिस्टर्ड लिव-इन से पैदा हुए बच्चे कानूनी रूप से पूरी तरह वैध माने जाएंगे। कानून की नजर में उनका दर्जा शादीशुदा जोड़े के बच्चे जैसा ही होगा। साथ ही उन्हें माता-पिता का नाम और पहचान भी कानूनी तौर पर मिलेगी। 2. संपत्ति में जन्म से हक: बच्चों को अपने माता और पिता, दोनों की पैतृक और खुद कमाई हुई संपत्ति में जन्म से ही बराबर अधिकार मिलेगा। इसके लिए उन्हें खुद को संतान साबित करने या कोर्ट के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 3. ब्रेकअप के बाद जिम्मेदारी: लिव-इन कपल के अलग होने पर महिला को भरण-पोषण यानी आर्थिक सहारा मिलने का प्रावधान प्रस्ताव में शामिल है। चूंकि बच्चे को अब कानूनन वैध माना जाएगा, इसलिए तार्किक तौर पर उसकी कस्टडी, शिक्षा और भरण-पोषण के भी वही नियम लागू होने की उम्मीद है, जो शादीशुदा जोड़ों के बच्चों पर लागू होते हैं। हालांकि, ड्राफ्ट बिल विधानसभा में पेश होने के बाद ही इन प्रावधानों की आधिकारिक तस्वीर साफ हो सकेगी। सवाल 5: क्या UCC लागू होने से सात फेरे या निकाह जैसी परंपराएं खत्म हो जाएंगी? जवाबः ऐसा नहीं है। सवाल 6: संपत्ति पर किसका-कितना हक होगा, क्या यह बदल सकता है? जवाबः प्रदेश के UCC ड्राफ्ट में कमेटी ने दो बदलावों का प्रस्ताव रखा है... 1. पिता को बराबर हक: मौजूदा व्यवस्था में उत्तराधिकार के नियम अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के तहत तय होते हैं। प्रस्तावित ड्राफ्ट में 'मां' की जगह 'माता-पिता' शब्द इस्तेमाल करने की सिफारिश की गई है। इसका मकसद यह है कि मां के न होने की स्थिति में भी पिता का उत्तराधिकार का अधिकार बना रहे। 2. बेटियों को बेटों के बराबर हक: हिंदू बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार 2005 से मिल चुका है। प्रस्तावित UCC के तहत इसी तरह के समान उत्तराधिकार सभी समुदायों की बेटियों को देने की व्यवस्था की गई है, ताकि धर्म के आधार पर अलग-अलग नियम न रहें। सवाल 7: किन समुदायों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है और क्यों? जवाबः कमेटी ने अनुसूचित जनजातियों (ST) के साथ-साथ घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों को UCC के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की है। सवाल 8: क्या UCC किसी धर्म के खिलाफ है? जवाबः नहीं, UCC किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है। मध्य प्रदेश में UCC का मसौदा तैयार करने से पहले राज्य स्तरीय समिति ने आम लोगों से सुझाव मांगे थे। समिति के मुताबिक, उसे करीब साढ़े नौ लाख सुझाव मिले। एमपी एक्सप्लेनर की यह खबर भी पढ़ें… क्या नरोत्तम के आंसू हार की वजह बनेंगे 15 साल दतिया के विधायक रहे नरोत्तम मिश्रा टिकट कटने के बाद मंच पर भावुक नजर आए। इसके बाद गुरुवार को आशुतोष तिवारी की मौजूदगी में अपने कार्यकर्ताओं से कहा- लोग कहने लगे हैं कि आशुतोष ने टिकट काट दिया। उसकी क्षमता है टिकट काटने की? टिकट काटने वाले कोई और हैं। पढ़ें पूरी खबर…

Admin · 7/19/2026

26 जुलाई से शुरू होगी शनि की उल्टी चाल:वृषभ, सिंह और मकर राशि वालों की चमकेगी किस्मत; मेष और मीन वाले रहें सावधान

ज्योतिष शास्त्र में सबसे प्रभावशाली माने जाने वाले ग्रह शनि देव 26 जुलाई से वक्री होने जा रहे हैं, यानी इस दिन से शनि की उल्टी चाल शुरू होगी, जो लगभग 140 दिनों तक चलेगी। न्याय, धर्म और अध्यात्म के कारक शनि की इस बदली चाल का असर देश-दुनिया समेत सभी 12 राशियों पर देखने को मिलेगा। इन राशियों को रहना होगा सतर्क ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, शनि के वक्री होने पर मेष राशि के लोगों में तनाव और एंग्जाइटी बढ़ सकती है। ऐसे में बेवजह अधिक सोचने से बचने की सलाह दी गई है। वहीं मीन राशि के जातकों को जल्दबाजी से बचते हुए शांत मन से निर्णय लेने चाहिए। वृषभ, सिंह और मकर राशि के लिए शुभ संकेत वहीं वृषभ, सिंह और मकर राशि के लोगों के लिए यह समय लाभदायक माना जा रहा है। करियर, कार्यक्षेत्र और नई योजनाओं में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना जताई गई है। देश-दुनिया पर भी पड़ सकता है असर ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डिब्बेवाला के मुताबिक, शनि करीब 135 से 140 दिन में अपनी चाल बदलते हैं। उनका कहना है कि इस बार शनि के वक्री होने का असर वैश्विक राजनीति, विदेश नीति और कूटनीतिक समझौतों पर दिखाई दे सकता है। देशों में सीमा सुरक्षा, आंतरिक विकास और संसाधनों को मजबूत करने पर अधिक ध्यान दिया जा सकता है। उनके अनुसार भारत के लिए यह समय शोध और नई उपलब्धियों के लिहाज से शुभ माना जा रहा है। प्राकृतिक असंतुलन की भी आशंका ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान अत्यधिक बारिश, भूस्खलन, भूकंप जैसी प्राकृतिक घटनाओं की संभावना भी बढ़ सकती है। हालांकि यह ज्योतिषीय आकलन है और इसे वैज्ञानिक पूर्वानुमान नहीं माना जाता। क्या होता है शनि का वक्री होना? खगोल विज्ञान के अनुसार, शनि वास्तव में उल्टी दिशा में नहीं चलता। पृथ्वी सूर्य के अधिक निकट होने के कारण शनि की तुलना में तेज गति से अपनी कक्षा में घूमती है। जब पृथ्वी शनि को ओवरटेक करती है, तब पृथ्वी से देखने पर शनि कुछ समय के लिए पीछे की ओर चलता हुआ दिखाई देता है। इसी आभासी स्थिति को वक्री कहा जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शनि के अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय ये खबर भी पढ़ें… 7 साल बाद सावन की तीसरी सवारी और नागपंचमी साथ भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में इस बार सावन में दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है। 17 अगस्त को सावन की तीसरी सवारी और नागपंचमी एक ही दिन पड़ रही है। इसी दिन साल में सिर्फ एक बार खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट भी श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। दोनों बड़े आयोजन एक साथ होने से महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। पढ़ें पूरी खबर…

Admin · 7/18/2026

संडे मानसून अपडेट: MP के 39 जिलों में कम बारिश:अब तक 9.7 इंच ही हुई; सूखा रहा बीता सप्ताह, इस हफ्ते से उम्मीद

मध्य प्रदेश में मानसून की बेरुखी से बारिश के ओवरऑल आंकड़े में गिरावट आ रही है। प्रदेश में अब तक औसत 9.7 इंच पानी गिरा है, जो सामान्य बारिश से 15% कम है। बीता सप्ताह सूखा रहा। अब अगले सप्ताह से उम्मीद है। बता दें कि इस बार मानसून 9 दिन देरी से 24 जून को पहुंचा था और अगले नौ दिन में पूरे प्रदेश को कवर कर लिया। देरी की वजह से प्रदेश में जून महीने में 30 प्रतिशत बारिश कम हुई थी, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में ये आंकड़ा प्लस में 8 प्रतिशत पर आ गया। दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर रहा। कहीं भी भारी बारिश नहीं हुई। इस वजह से औसत आधा इंच पानी भी नहीं गिरा। इस वजह से जुलाई भी सूखा ही बीत रहा है। 1.7 इंच बारिश कम IMD (मौसम केंद्र) भोपाल की माने तो प्रदेश में अब तक औसत 11.4 इंच बारिश होनी थी, लेकिन यह 9.7 इंच ही हुई। इस तरह 1.7 इंच पानी कम गिरा है। हालांकि, यह कोटे की कुल 25 प्रतिशत है। देवास में सबसे ज्यादा, आलीराजपुर में सबसे कम अबकी बार पश्चिमी हिस्से में बारिश की सबसे अच्छी स्थिति है। खासकर मालवा-निमाड़ यानी, इंदौर-उज्जैन संभाग के जिलों में अच्छा पानी बरसा है। उज्जैन संभाग के देवास जिले में सबसे ज्यादा 17.9 इंच बारिश हुई है, जो कोटे की 50 प्रतिशत से ज्यादा है। वहीं, आलीराजपुर में सिर्फ 2.3 इंच बारिश ही हुई है। यानी, कोटे की करीब 7 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है। इन जिलों की अच्छी-बुरी स्थिति कम बारिश वाले 39 जिले- अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, दतिया, धार, गुना, झाबुआ, मुरैना, नर्मदापुरम, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी और विदिशा। ज्यादा बारिश वाले 16 जिले- निवाड़ी, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, देवास, ग्वालियर, हरदा, इंदौर, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, सीहोर और उज्जैन। डैम-नदियों में भी पानी की कमी बारिश का दौर थमने से डैम और नदियों में पानी कम हो गया है। पिछले सप्ताह से नर्मदा, लखुदंर समेत कई नदियों में पानी आ गया था। लखुंदर नदी तो आगर जिले में ओवरफ्लो हो रही थी। वहीं, सीहोर से निकली कोलांस नदी भी उफान पर रही, लेकिन बारिश नहीं होने से नदियां फिर से सूख रही है। ऐसे समझें बारिश का गणित… सबसे ज्यादा बारिश वाले जिले मध्यप्रदेश में कैसा रहेगा यह सप्ताह? मौसम एक्सपर्ट शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि मौसम विज्ञान की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण संकेत अगले सप्ताह के लिए मिल रहे हैं। वर्तमान निम्न दाब क्षेत्र के कमजोर होने के बाद विभिन्न वैश्विक मौसम मॉडल यह संकेत दे रहे हैं कि 20 से 22 जुलाई के बीच उत्तर या उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में एक नया निम्न दाब क्षेत्र विकसित होने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो सकती हैं। इसका मध्य प्रदेश के साथ ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी असर रहेगा। इसके बाद पूरे प्रदेश में अच्छी बारिश होने के संकेत है। 5 बड़े शहरों में ऐसा रहेगा मौसम भोपाल: भोपाल में कोटे का 34 प्रतिशत यानी, 12.9 इंच पानी गिर चुका है। हालांकि, पिछले एक सप्ताह से यही स्थिति है, लेकिन बारिश के लिहाज से अगला सप्ताह बेहतर रह सकता है। संभाग के सीहोर और राजगढ़ में भी एक तिहाई बारिश हुई है, जबकि विदिशा में सबसे 24 प्रतिशत पानी गिरा है। इंदौर: बारिश के मामले में इंदौर की स्थिति फिलहाल बेहतर है। यहां करीब 14 इंच बारिश हुई है। बुरहानपुर, खंडवा और खरगोन में भी 10 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है, लेकिन आलीराजपुर प्रदेश में सबसे नीचे है। यहां 2.3 इंच बारिश ही हुई है। जबलपुर: जबलपुर में अब तक 9 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। यह कोटे की 25 प्रतिशत ही है। यहां तेज बारिश का दौर फिलहाल थमा हुआ है। उज्जैन: उज्जैन में कोटे की 33.5 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। 11.7 इंच बारिश होने से काफी राहत मिली है। संभाग का देवास प्रदेश में सबसे आगे है। यहां करीब 18 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है, जो कोटे से 50 प्रतिशत तक है। रतलाम, शाजापुर, मंदसौर, नीमच और आगर-मालवा में 9 इंच से ज्यादा पानी गिरा है। ग्वालियर: इस बार भी ग्वालियर-चंबल संभाग में मानसून सबसे लेट पहुंचा। फिर भी बारिश के आंकड़े राहत दे रहे हैं। दतिया और शिवपुरी को छोड़ दें तो बाकी जिलों में 25 प्रतिशत से ज्यादा बारिश हो चुकी है। अगले सप्ताह से यहां भी तेज बारिश का दौर शुरू होगा।

Admin · 7/18/2026

सीएम के हेलिकॉप्टर में बैठने के लिए दौड़े मंत्री:सिंधिया ने 'हाईकमान' के लिए खरीदीं चूड़ियां; महिला मंत्री का 'ड्रिंक' वाला प्रयोग

मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। 'बात खरी है' मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। हेलिकॉप्टर में बैठने के लिए दौड़े मंत्री मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हेलिकॉप्टर में बैठने के लिए मंत्री दिलीप अहिरवार ने दौड़ लगा दी। इसका वीडियो सामने आया है। अब लोग इसे चटकारे लेकर शेयर कर रहे हैं। वाकया टीकमगढ़ का है। यहां आयोजित कार्यक्रम के बाद सीएम डॉ. मोहन यादव को खजुराहो के लिए रवाना होना था। वे हेलिपैड पर पहुंच चुके थे, लेकिन मंत्री दिलीप अहिरवार काफिले में पीछे रह गए थे। उन्हें भी सीएम के साथ जाना था। सीएम हेलिकॉप्टर में बैठ चुके थे। हेलिकॉप्टर का दरवाजा भी बंद हो गया था और उसके पंखे घूमने लगे थे। हेलिकॉप्टर उड़ान भरने के लिए तैयार था। तभी 'आज कुछ तूफानी करते हैं' वाले अंदाज में मंत्री दिलीप अहिरवार की एंट्री हुई। वे दौड़ लगाते हुए हेलिकॉप्टर तक पहुंचे और आखिरकार उसमें सवार हो ही गए। खरी बात ये है कि राजनीति में भी ऊंची उड़ान भरने के लिए ऐसी ही टाइमिंग और रनिंग जरूरी होती है। मंत्री दिलीप अहिरवार ने इसका शानदार डेमो दे दिया। सिंधिया ने पत्नी के लिए लीं चूड़ियां केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक दिलचस्प वीडियो सामने आया है। इसमें वे अपनी पत्नी के लिए पीले रंग की चूड़ियां लेते नजर आ रहे हैं। खास बात यह रही कि चूड़ियां लेते समय उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा- ये मेरी हाईकमान के लिए। उनकी यह बात सुनकर वहां मौजूद लोग भी मुस्कुरा उठे। दरअसल, सिंधिया अशोकनगर में आयोजित आजीविका मिशन के एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने वहां लगे स्टॉलों का अवलोकन किया और महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की जानकारी ली। उनकी नजर चूड़ियों के एक स्टॉल पर पड़ी। वे वहां रुके और स्टॉल संचालित कर रही महिला सपना से बातचीत की। साथ ही चूड़ियां पसंद आने पर पत्नी के लिए गिफ्ट के रूप में ले लीं। खरी बात ये है कि राजनीति में लंबे समय से रंग जमा चुके सिंधिया अच्छी तरह जानते हैं कि अगर घर की "हाईकमान" खुश रहे, तो सब खुश रहते हैं। विजयवर्गीय बोले- मैं सठिया गया हूं ‘मैं 70 साल का हो गया हूं। यूं ही सठिया गया हूं।’ इंदौर के एक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जैसे ही यह बात कही, वहां मौजूद लोग ठहाके लगाने लगे। दरअसल, मंत्री विजयवर्गीय कह रहे थे कि मैं जो भी करता हूं, मुंह पर करता हूं। पीठ पीछे नहीं। जो गलत है, वो गलत है और जो सही है, वो सही है। किसी को बुरा लगे तो लगे, अपने को क्या फर्क पड़ता है। अब सवाल यह है कि आखिर उनका यह संदेश किसके लिए था। उनके इस बयान के राजनीतिक मायने भी तलाशे जा रहे हैं। इसकी वजह यह है कि हाल ही में कैलाश विजयवर्गीय सरकार में अपनी उपेक्षा का दर्द जाहिर कर चुके हैं। खरी बात ये है कि विजयवर्गीय के बयान अक्सर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन जाते हैं। ऐसे में उनका यह बेबाक अंदाज एक बार फिर नई अटकलों को जन्म दे गया। मंत्री ने बात समझाने लैब सजा दी नेताओं पर कोई कुछ आरोप लगा दे तो देखने में आता है कि वे भी पलटवार करते हैं। प्रत्यारोप करते हैं, सफाई देते हैं, तथ्य रखते हैं लेकिन मंत्री प्रतिमा बागरी ने तो पूरी लैब सजा दी। फिर 'ड्रिंक' वाला एक्सपेरिमेंट कर जवाब दिया। मामला उनकी जाति से जुड़े विवाद का है, जिसमें जांच कमेटी ने माना कि मंत्री प्रतिमा बागरी अनुसूचित वर्ग से ही आती हैं। उनका जाति प्रमाण पत्र एकदम सही है। मंत्री ने अपनी बात समझाने के लिए तीन ग्लास लिए। एक में चाय, दूसरे में कॉफी और तीसरे में ग्रीन टी ली। फिर उन्हें अलग-अलग रॉयल स्टैग के ग्लास में भर दिया। मंत्री ने बताया कि अगर वे नहीं बताएं कि इसमें क्या है, तो ये कोई नहीं बता पाएगा। मंत्री ने बताया कि क्या इन पेय पदार्थों को दूसरे ग्लास में शिफ्ट करने से इनकी परिभाषा बदल जाएगी। क्या प्रतिमा बागरी पर आरोप लगाने से उनकी परिभाषा बदल जाएगी। मंत्री ने बताया कि उन पर लगे आरोप भी कुछ ऐसे ही हैं। अब मंत्री का अपनी बात समझाने का ये तरीका चर्चा का विषय बना हुआ है। और अब अंदर की बात.. सुपरवाइजर ने करा दिया नुकसान एक सरकारी भवन के सुपरवाइजर की हठधर्मिता की वजह से सरकार को हजारों रुपए का नुकसान हो गया। अब ये नुकसान वन टाइम नहीं है, बल्कि हर बार ही सरकार को हजारों रुपए की चपत लगने वाली है। दरअसल, राजधानी में एक सरकारी भवन है, जो निजी संस्थाओं को कार्यक्रम के आयोजन के लिए किराए पर दिया जाता है। सत्ता से बेहद नजदीकी रखने वाला एक संगठन हर बार यहां कार्यक्रम का आयोजन करता आ रहा है। इसके लिए ये संगठन बाकायदा किराया देता था और रसीद भी कटवाता था। कुछ दिन पहले ऐसे ही एक कार्यक्रम के दौरान संगठन से जुड़े पदाधिकारियों ने इस भवन के सुपरवाइजर से मंच पर रखी टेबल हटाने के लिए कहा, तो सुपरवाइजर ने इनकार कर दिया। फिर क्या था, इसकी शिकायत सरकार से की गई। सरकार ने सरकारी भवन का संचालन करने वाले विभाग के एमडी से कहा। एमडी ने सुपरवाइजर को डांटने के साथ ये भी कहा कि अब इनसे किराया मत लेना। इनपुट सहयोग- शैलेंद्र द्विवेदी (टीकमगढ़), संजीव यादव (अशोकनगर), संतोष शितोले (इंदौर), प्रशांत द्विवेदी (सतना)। बात खरी है का ये एपिसोड भी पढ़ें… भाजपा विधायक की शपथ- मैं नशा करूंगा: कांग्रेस विधायक बोले- गद्दारों का मुंह काला करके भेजूंगा सिंगरौली में भाजपा विधायक रामनिवास शाह एक कार्यक्रम में नशा मुक्ति की शपथ दिला रहे थे, लेकिन उन्होंने नशा न करने की बजाय नशा करने की शपथ दिला दी। विधायक ने शपथ दिलाते हुए कहा- ‘मैं शपथ लेता हूं कि.. मैं जीवन में.. कभी नशा करूंगा..।’ दरअसल, वे 'नहीं' शब्द बोलना भूल गए। पढ़ें पूरी खबर…

Admin · 7/18/2026

छतरपुर-पन्ना में भारी बारिश का अलर्ट:जबलपुर-ग्वालियर समेत 34 जिलों में बूंदाबांदी; एमपी के पास 4 चक्रवात और एक ट्रफ एक्टिव

मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना में अगले 24 घंटे के अंदर भारी बारिश का अलर्ट है। वहीं, जबलपुर-ग्वालियर समेत 34 जिलों में बूंदाबांदी हो सकती है। भोपाल, इंदौर-उज्जैन में मौसम साफ रहेगा। उधर, तेज बारिश के लिए प्रदेश में टोने-टोटके का दौर भी जारी है। शनिवार को भोपाल में गधे को गुलाब जामुन खिलाए गए। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश के आसपास चार साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवात) और एक ट्रफ एक्टिव है। इस वजह से शनिवार को भोपाल, नर्मदापुरम समेत कई जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हुई। ऐसा ही मौसम रविवार को भी बना रहेगा। आज छतरपुर-पन्ना में भारी बारिश का अलर्ट है तो रायसेन, विदिशा, नर्मदापुरम, बैतूल, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, दमोह, टीकमगढ़ और निवाड़ी में बूंदाबांदी हो सकती है। वहीं, भोपाल, राजगढ़, सीहोर, हरदा, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर और देवास में मौसम के साफ रहने का अनुमान है। मैप से समझें, 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम जुलाई में अब तक सामान्य से 15% कम बारिश मध्य प्रदेश में पिछले 9 दिन में किसी भी जिले में भारी या अति भारी बारिश दर्ज नहीं की गई है। इस वजह से सामान्य बारिश का आंकड़ा लगातार कम हो रहा है। शनिवार तक यह आंकड़ा सामान्य से 15 प्रतिशत कम हो गया। प्रदेश में अब तक 247 मिमी बारिश हो चुकी है, जो सामान्य बारिश के 291 मिमी से 15% कम है। दूसरी ओर, पूर्वी हिस्से के जिलों में 26 प्रतिशत पानी कम गिरा है। वहीं, पश्चिमी हिस्से में भी 5% कम बारिश दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38-39 इंच तक है। जून के बाद जुलाई में भी आंकड़ा कम मौसम विभाग के अनुसार, जून में कम बारिश हुई लेकिन जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह आंकड़ा बढ़ गया। बाद में लगातार 9 दिन से तेज बारिश नहीं होने से आंकड़ा माइनस में आ गया है। बता दें कि जुलाई में इस महीने पूरे मानसून की एक तिहाई बारिश का ट्रेंड है। जैसे- भोपाल में 39 इंच सामान्य बारिश है तो 14 इंच बारिश जुलाई में होती है। बड़े शहरों में जबलपुर ही ऐसा है, जहां सबसे ज्यादा 17 इंच से ज्यादा बारिश होती है। जुलाई के महीने में ही प्रदेश में कोटे की 40 प्रतिशत तक बारिश होती है। देवास में 18 इंच पानी गिरा, आलीराजपुर में सबसे कम प्रदेश में देवास सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला है। यहां 102 प्रतिशत ज्यादा पानी गिर चुका है। मौसम विभाग के आंकड़ों की मानें तो यहां अब तक 18 इंच बारिश हो चुकी है। इंदौर-सीहोर में 14 इंच बरसात हुई है। हरदा में 15 इंच पानी गिर चुका है। वहीं, भोपाल में 13.1 इंच पानी गिरा है। आगर-मालवा, अशोकनगर, बैतूल, बुरहानपुर, गुना, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर, उज्जैन, विदिशा, अनूपपुर, बालाघाट, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, मंडला, पांढुर्णा, पन्ना, सागर, सिवनी और उमरिया जिले भी बेहतर स्थिति में है। आलीराजपुर में सबसे कम सवा 2 इंच ही बारिश हुई है, जो सामान्य से 74 प्रतिशत कम है। जुलाई में MP के 5 बड़े शहरों में ऐसा ट्रेंड इंदौर में 24 घंटे में 11.5 इंच बारिश का रिकॉर्ड इंदौर की बात करें तो 24 घंटे में 11.5 इंच बारिश होने का रिकॉर्ड है, जो 27 जुलाई 1913 को हुई थी। वर्ष 1973 में पूरे महीने 30.5 इंच पानी गिरा था। बारिश के चलते यहां भी तापमान में गिरावट देखने को मिलती है। इंदौर में महीने की एवरेज बारिश 12 इंच है। जुलाई में सामान्य तौर पर 13 दिन यहां बारिश होती है। भोपाल में जुलाई में एवरेज 15 दिन बारिश होती है भोपाल में जुलाई में खूब बारिश होती है। यहां एक ही महीने में 1031.4 मिमी यानी 41 इंच के करीब बारिश होने का रिकॉर्ड है। यह साल 1986 में हुई थी। 22 जुलाई 1973 को एक ही दिन में 11 इंच बारिश हुई थी, जो अब तक का रिकॉर्ड है। भोपाल में जुलाई में एवरेज 15 दिन बारिश होती है यानी, हर दूसरे दिन पानी बरसता है। महीने की एवरेज बारिश 367.7 मिमी यानी 14.4 इंच है। बारिश के चलते दिन का तापमान 30 और रात में पारा 25 डिग्री सेल्सियस से कम रहता है। जबलपुर में पिछले साल 13 इंच से ज्यादा पानी गिरा प्रदेश के 5 बड़े शहरों में जबलपुर ऐसा है, जहां सबसे ज्यादा बारिश होती है। वर्ष 1930 में यहां करीब 45 इंच पानी बरसा था जबकि 30 जुलाई 1915 को 24 घंटे की सर्वाधिक 13.5 इंच बारिश हुई थी। पिछले साल जुलाई में 13 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। 2013 और 2016 में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी। जबलपुर में जुलाई की सामान्य बारिश 17 इंच है। महीने में 15 से 16 दिन पानी बरसता है। ग्वालियर में 6 बार 8 इंच से कम बारिश हुई भोपाल, इंदौर और जबलपुर की तुलना में ग्वालियर में सबसे कम बारिश होती है। पिछले 10 साल में 6 बार ऐसा हुआ, जब 8 इंच से कम पानी गिरा हो जबकि यहां की एवरेज बारिश 9 इंच के करीब है। ग्वालियर में वर्ष 1935 में महीने की सबसे ज्यादा बारिश हुई थी। तब 623.3 मिमी यानी 24.5 इंच बारिश दर्ज की गई थी। 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश की बात करें तो 12 जुलाई 2015 को 190.6 मिमी यानी साढ़े 7 इंच पानी बरसा था। ग्वालियर में जुलाई के महीने में एवरेज 11 दिन बारिश होती है। उज्जैन में जमकर होती है बारिश मध्य प्रदेश के अन्य शहरों की तरह उज्जैन में भी जुलाई में जमकर बारिश होती है। कोटे की करीब 40 प्रतिशत बारिश इसी महीने हो जाती है। ये खबर भी पढ़ें… संडे मानसून अपडेट: MP के 39 जिलों में कम बारिश मध्य प्रदेश में मानसून की बेरुखी से बारिश के ओवरऑल आंकड़े में गिरावट आ रही है। प्रदेश में अब तक औसत 9.7 इंच पानी गिरा है, जो सामान्य बारिश से 15% कम है। बीता सप्ताह सूखा रहा। अब अगले सप्ताह से उम्मीद है। बता दें कि इस बार मानसून 9 दिन देरी से 24 जून को पहुंचा था और अगले नौ दिन में पूरे प्रदेश को कवर कर लिया था। पढ़ें पूरी खबर…

Admin · 7/18/2026

MP में यूसीसी बिल को कैबिनेट की मंजूरी:विधानसभा सत्र में पेश करने की तैयारी; दो राज्यों में UCC विधेयक पारित, एक में लागू

मध्य प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड, यूसीसी) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रविवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यूसीसी विधेयक-2026 के ड्राफ्ट को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। अब इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा। विधानसभा का सत्र कल से शुरू हो रहा है। कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार विधेयक को विधानसभा में पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है। समानता भारतीय संस्कृति और मूल्यों का अभिन्न हिस्सा रही है। इसी भावना के अनुरूप सरकार ने यह कदम उठाया है। देश में उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य है, जबकि गुजरात और असम में यूसीसी विधेयक पारित हो चुका है। भोपाल के इतिहास का भी किया उल्लेख कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने भोपाल के गौरवशाली इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भोपाल का इतिहास परमार राजवंश और राजा भोज से जुड़ा है। यह क्षेत्र प्राचीन काल से सनातन संस्कृति का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि भोपाल का गहरा संबंध गोंड राजवंश से भी है। मदन शाह और संग्राम शाह जैसे शासकों ने क्षेत्र के विकास में योगदान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा- इतिहास में राजा निजाम शाह की विष देकर हत्या और उसके बाद रानी कमलापति द्वारा अपने पुत्र एवं प्रजा की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष का भी विशेष महत्व है। उन्होंने अफगान सरदार दोस्त मोहम्मद खान के दौर और बाद के शासनकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि भोपाल का इतिहास विभिन्न शासकों और संस्कृतियों से समृद्ध रहा है। अब तक दो राज्यों में UCC बिल पारित, एक में लागू जनवरी 2025: उत्तराखंड UCC लागू करने वाला पहला राज्य 6 फरवरी 2024 को विधानसभा में UCC विधेयक पेश हुआ। 7 फरवरी 2024 को पारित हुआ। 11 मार्च 2024 को राष्ट्रपति ने UCC विधेयक को मंजूरी दी। क्रियान्वयन समिति ने 18 अक्टूबर 2024 को नियमावली सरकार को सौंपी। 20 जनवरी 2025 को नियमावली को कैबिनेट की मंजूरी मिली। इस तरह उत्तराखंड UCC लागू करने वाला पहला राज्य बन गया। मार्च 2026: गुजरात UCC बिल पास करने वाला दूसरा राज्य बना गुजरात विधानसभा में मार्च 2026 में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पास कराया गया था। गुजरात UCC बिल पास करने वाला देश का दूसरा राज्य बना है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया था। विधानसभा में बिल पर वोटिंग के दौरान कांग्रेस ने वॉकआउट कर दिया था। बिल बहुमत से पास हो गया। मई 2026: असम UCC बिल पास करने वाला तीसरा राज्य बना असम विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल 27 मई को पेश किया गया था। यह बिल सदन से पारित भी हो गया। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के मुताबिक अनुसूचित जनजातियां (पहाड़ी) और अनुसूचित जनजातियां (मैदानी) UCC के दायरे से बाहर रहेंगी। साथ ही 'पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों, प्रथाओं और अनुष्ठानों' को भी इससे छूट दी जाएगी। आजाद भारत से पहले गोवा में UCC गोवा में पहले से ही UCC लागू है, लेकिन वहां इसे पुर्तगाली सिविल कोड के तहत लागू किया गया था। उत्तराखंड आजादी के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य है। सन् 1835 में, ब्रिटिश सरकार ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें आपराधिक साक्ष्य और अनुबंधों के संबंध में देश भर में एक समान कानून बनाने का आह्वान किया गया था। इसे सन् 1840 में लागू भी किया गया, लेकिन धर्म के आधार पर हिंदुओं और मुसलमानों के व्यक्तिगत कानूनों को अलग रखा गया। यहीं से समान नागरिक संहिता की मांग शुरू हुई। 1941 में बीएन राव समिति का गठन किया गया था, जिसने हिंदुओं के लिए एक समान नागरिक संहिता बनाने की बात कही थी। आजादी के बाद, हिंदू संहिता विधेयक पहली बार 1948 में संविधान सभा में प्रस्तुत किया गया था। इसका उद्देश्य हिंदू महिलाओं को बाल विवाह, सती प्रथा और बुर्का जैसी गलत प्रथाओं से मुक्त करना था। ……………………………….. यह खबर भी पढ़ें बंगाल में भी UCC लाने की तैयारी: भाजपा ने सरकार बनने के 6 महीने के अंदर लागू करने का वादा किया था पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार 29 जून को विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश करने वाली थी। हालांकि, बिल पेश नहीं हो पाया। भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले अपने संकल्प पत्र में सरकार बनने के छह महीने के भीतर पश्चिम बंगाल में UCC लागू करने का वादा किया था। 9 मई को नई सरकार का गठन हुआ था। पूरी खबर पढ़ें...

Admin · 7/18/2026