Satna News: मानसिक तनाव दूर करने के लिए अपनाया था अनोखा तरीका, आज बन गए सफल मूर्तिकार

Satna News: मानसिक तनाव दूर करने के लिए अपनाया था अनोखा तरीका, आज बन गए सफल मूर्तिकार


रिपोर्ट- प्रदीप कश्यप
सतना. 
सतना जिले के परिवहन विभाग में काम करने वाले सहायक ग्रेड 2 के एक कर्मचारी ने मानसिक तनाव दूर करने के लिए अनोखी शुरुआत की. उन्होंने वो किया जो पहले कभी नहीं किया था, उनके मन में मूर्ति बनाने का विचार आया और घर में रखे चाकू की मदद से लकड़ी की मूर्ति तैयार करने लगे. दरअसल गणेश जी के एक स्टीकर को देख उनके मन में ख्याल आया कि कुछ इसी आकार में लकड़ी से मूर्ति बनाई जाए. आज ये शख्स एक सफल मूर्तिकार बन चुका है.

मध्य प्रदेश परिवहन विभाग में काम कर रहे इस कर्मचारी का नाम है शिवेंद्र सिंह. जो पिछले कई वर्षों से साल के पूरे 365 दिन प्रतिदिन अपना कुछ समय गणेश भगवान की प्रतिमा गढ़ने में देते हैं. मानसिक तनाव से मुक्ति के लिए शुरू की गई कलाकारी से आज वह एक मंझे हुए मूर्तिकार बन चुके हैं, शिवेंद्र सिंह 65 से अधिक विभिन्न प्रकार की लकड़ियों से गणेश प्रतिमाएं बना चुके हैं. आइए शिवेंद्र सिंह से जानते हैं कि कैसे उन्होंने इसकी शुरुआत की.

ऐस हुई शुरुआत
सतना जिले के राजेंद्र नगर बसंत विहार कॉलोनी में रहने वाले शिवेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि साल 2005 में उनके पास परिवहन विभाग के कार्यों के भार के साथ परिवारिक उलझने बढ़ने लगीं. मानसिक तनाव बढ़ता ही जा रहा था, इसी बीच एक दिन वह अपने परिवार के निजी कार्यक्रम में कार से जा रहे थे, और जाते वक्त कार में लगे गणेश प्रतिमा के स्टीकर को देखकर उनके मन में ख्याल आया कि क्यों ना इस प्रतिमा को बनाने का प्रयास करें. फिर क्या था, वह कार्यक्रम से अपने घर पहुंचे इसके बाद घर की किचन में रखे चाकू और कुछ नुकीली चीजों से उस स्टिकर के आकार की गणेश प्रतिमा को लकड़ी पर गढ़ना शुरू कर दिया, एक बार नहीं कई बार उसे बनाने का प्रयास किया, और आखिरकार उन्होंने उस प्रतिमा को तैयार कर लिया.

नीम, कदंब, आम, चंदन सहित कई लकड़ियों से गढ़ी प्रतिमाएं
शिवेन्द्र सिंह का कहना है कि उन्हें इस कार्य को करने में मन को शांति मिली, तब से अपनी नौकरी के साथ-साथ वह प्रतिदिन सुबह 2 घंटे का समय गणेश प्रतिमा को बनाने में देने लगे, वह अपने घर में विभिन्न प्रकार के औजारों से नीम, कदंब, चंदन, सफेद मदार, आम सहित अन्य पेड़ों की लकड़ियों से गणेश प्रतिमा गढ़ने लगे.

लकड़ी की 7 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा भी तैयार की
शिवेंद्र की माने तो वह इन गणेश प्रतिमाओं को बाजार में कभी नहीं बेचते, अपने घर के चारों कोने में उन्होंने मूर्तियां सजा कर रखा है, उनका कहना है कि हर व्यक्ति के अंदर एक न एक कला होती है, उस कला को पहचानकर उससे रूबरू होना चाहिए, शिवेंद्र अभी तक सबसे बड़ी 7 फीट तक की गणेश प्रतिमा बना चुके हैं, उनका सपना है कि गिनीज बुक में उनका नाम दर्ज हो.

Tags: Ganesh, Satna news



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