इंदौर: भगवान परशुराम की जन्मस्थली और साढ़े 7 नदियों का उद्गम है पहाड़ की इस चोटी पर

इंदौर: भगवान परशुराम की जन्मस्थली और साढ़े 7 नदियों का उद्गम है पहाड़ की इस चोटी पर


रिपोर्ट- हरिकेश द्विवेदी

महू. इंदौर से लगभग 28 किमी दूर विंध्यांचल की दूसरी सबसे बड़ी पर्वत शृंखला पर मालवा के पठार में स्थित जानापाव कुटी अपने आप में एक ऐतिहासिक धरोहर और तीर्थ स्थल भी हैं. यह जमदग्नि ऋषि की तपोभूमि और भगवान परशुराम की जन्मस्थली भी कही जाती है. यहां जमद्गेश्वर महादेव और भगवान परशुराम का मंदिर बना हुआ है, जिसके दर्शन हेतु देश भर से लोग यहां आते है. यहां पहाड़ी पर साढ़े 7 नदियों का उद्गम स्थल है. कहा जाता है की कुटी में जन्म के बाद भगवान परशुराम शिक्षा ग्रहण करने कैलाश पर्वत पर चले गए थे जहां उन्होंने भगवान शिव से शस्त्र एवं शास्त्र की शिक्षा ग्रहण की थी.

चारों तरफ घने जंगल और उबर खाबड़ रास्तों के बीच सफर काफी रोमांचक हो जाता है, हालांकि अब पक्का रास्ता भी बन चुका है जो गांव से गुजरते हुए सीधे मंदिर तक ले जाता है. पहाड़ी मार्ग में कई बार जंगली जानवर भी देखे जा चुके है. यह स्थान महू तहसील के हासलपुर गांव में स्थित है.

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पहाड़ों से निकलती है साढ़े साथ नदियां
जानापाव पहाड़ी से साढ़े 7 नदियां निकलती है. जिनमे कुछ नदियां यमुना एवं नर्मदा में जाकर मिलती है. चंबल, सुमरिया, गंभीर, अग्रेड, चोरल, कारम, बीरम और नेकेड़ेश्वरी नदियों का यह उदगम स्थल है. यह नदियां सैकड़ों किमी बहते हुए कुछ यमुना तो तीन नदियां नर्मदा में मिलती है.

पुराणों में मिलता है उल्लेख
जमदग्नि ऋषि भगवान परशुराम के पिता थे जो घोर तपस्या करते थे उन्हें तपस्वी कहा गया है और माता राजा प्रसेनजीत की पुत्री रेणुका थी. भगवान परशुराम अपने पिता के पांच पुत्रों में से एक थे अन्य भाइयों के नाम रुक्मवान , सुखेण, वसु , विस्वानस थे. कथा है की एक बार नदी किनारे रेणुका स्नान कर रही थी उसी समय राजा चित्ररथ भी स्नान करने आया. रेणुका राजा पर मोहित हो उठी , तपस्वी जमदग्नि को पत्नी के इस आचरण का आभास हो गया. तपस्वी ने अपने पांचों पुत्रों को यह आदेश दिया की वो अपनी मां का सिर काट दें, लेकिन पांचों पुत्रों में से सिर्फ भगवान परशुराम ने पिता की इस आज्ञा का पालन किया.

पिता ने परशुराम से प्रसन्न होकर उनसे वरदान मांगने को कहा जबकि अपने अन्य पुत्रों की चेतना शून्य होने का श्राप दे दिया. कथा कही जाती है की परशुराम ने अपने पिता से 3 वर मांगे थे .

1 – माता को पुन: जीवन देने और उनके सिर काटने वाली बात उन्हे कभी याद न रहे .

2- दूसरा उनके चारों भाइयों की खोई हुई चेतना उन्हे वापस मिले.

3- तीसरा वरदान यह मांगा की वो कभी किसी युद्ध में पराजित न हो और एक लंबी आयु का वर मांगा था.

पुरातत्व विभाग की खोज में ढाई हजार वर्ष पुराना है मंदिर
पुराणों और इतिहास में इस मंदिर का जिक्र कई जगह मिलता है पुरातत्व विभाग की रिसर्च में मंदिर से जुड़े अवशेष लगभग ढाई हजार वर्ष पुराने माने गए है. परशुराम जयंती, गुरु पूर्णिमा पर श्रृद्धालुओं की एक लंबी भीड़ यहां नजर आती हैं. राजनेता से लेकर फिल्मी सितारे भी भगवान परशुराम के चरणों में अपना सिर झुकाने आते है. यहां जमदग्नि ट्रस्ट मंदिर की देख रेख करता है , 108 गायों की गौशाला है जिसकी देखभाल भी मंदिर के पुजारी ब्रम्हचारी हीरा जी करते है.

मुख्यमंत्री शिवराज परशुराम जन्मस्थली को एक भव्य रूप देने वादा कर चुके है. कहा गया था की मंदिर को अयोध्या की तर्ज पर बनाया जाएगा . फिलहाल मंदिर बनकर तैयार है लेकिन अभी भी कई सारे काम बाकी दिखाई देते है.

Tags: Indore news



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